लाइसेंस लेकर ही चल सकती है इंटरनेट की ‘डोर’
देश में इंटरनेट सेवा देने के लिए सरकार से बाकायदा अनुमति यानी आईएसपी (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) लाइसेंस लेना जरूरी होता है। यह लाइसेंस दूरसंचार विभाग (डीओटी) जारी करता है। लाइसेंस राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर और जिला स्तर के होते हैं।
लाइसेंस के लिए कंपनी को पहले अपनी फर्म रजिस्टर्ड करानी पड़ती है और फिर तय सिक्योरिटी डिपॉजिट (करीब 50 हजार से दो लाख रुपये तक) जमा करनी होती है। सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप नीति 2024’ के तहत अब ऐसे स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा दिया जा रहा है जो अपने शहर या गांव में इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यही है कि देश के हर कोने में इंटरनेट पहुंचे और लोग बड़ी कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर न रहें।
गांव-गांव तक पहुंचा रहे सर्विस
आरएस पुरा के मदन सिंह चार साल से इंटरनेट सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपना नेटवर्क आरएस पुरा से आसपास के 20 गांवों तक फैलाया है। मदन बताते हैं कि शुरुआत में कुछ ही घरों को कनेक्शन दिया था। अब चार सौ से ज्यादा घर हमारी सेवा ले रहे हैं।
हमारे प्लान 500 से शुरू होते हैं और 1,000 रुपये तक जाते हैं। जम्मू के सनम महाजन बताते हैं कि उन्होंने 2019 में यह काम शुरू किया था। अब उनके पास पास हजार से ज्यादा कनेक्शन हैं, जिनमें ज्यादातर दुकानदार और छोटे कारोबारी शामिल हैं। सनम कहते हैं कि बड़ी कंपनियों के पास पैसा और साधन जरूर हैं, लेकिन वे ग्राहक को उतनी जल्दी सुविधा नहीं दे पातीं। हम एक कॉल पर कनेक्शन देते हैं, इसलिए लोग हम पर भरोसा करते हैं। इसके साथ ही वह और उन जैसे कई और सर्विस प्रोवाइडर अब दर्जनों युवाओं को तकनीकी, इंस्टॉलेशन और सर्विस सपोर्ट से जोड़ रहे हैं।