केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट का असमंजस भी खत्म होगा। सेना, पुलिस सहित अन्य विभागों में होने वाली भर्तियों में हिस्सा लेने के लिए अब भी स्टेट सब्जेक्ट देना पड़ रहा है। संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 31 अक्तूबर के बाद ही साफ हो पाएगा कि क्या बदलाव होता है। फिलहाल स्टेट सब्जेक्ट लिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पहले से अधिसूचित सेना और पुलिस की भर्ती में आवेदक से स्टेट सब्जेक्ट लिया जा रहा है। इस वजह से हजारों युवा भर्ती में हिस्सा नहीं ले सके हैं। दमकल विभाग में हुई भर्ती में भी स्टेट सब्जेक्ट न देने वाले उम्मीदवार हिस्सा नहीं ले सके। खासकर रिफ्यूजी युवा भर्ती से महरूम रह गए।
युवा संजीव ने कहा कि तीन भर्तियां निकल गई हैं। वह किसी में भी हिस्सा नहीं ले पाया है। इनमें स्टेट सब्जेक्ट अनिवार्य बताया गया है। सीमावर्ती इलाके सुचेतगढ़ निवासी सोहन का कहना है कि बार्डर बटालियन के लिए होने वाली भर्ती में वह आवेदन नहीं कर सका। क्योंकि इसके लिए स्टेट सब्जेक्ट मांगा जा रहा है। अब देखना होगा कि स्टेट सब्जेक्ट को लेकर क्या निर्देश आते हैं।
74वें संशोधन पर असमंजस
राज्य पुनर्गठन कानून लागू होने पर संविधान का 74वां संशोधन लागू होगा या नहीं, इसके लेकर नगर निगम में असमंजस की स्थिति है। मेयर, डिप्टी मेयर और कमिश्नर के बयान अलग-अलग हैं। 74वें संशोधन के लागू होने को लेकर नगर निगम के पास कोई अधिकारिक पत्र नहीं पहुंचा है। इसके कारण निगम के अधिकारियों से लेकर मेयर और डिप्टी मेयर के बयान अलग है। नगर निगम के कमिश्नर पंकज मंगोत्रा ने कहा कि म्यूनिसपल कारपोरेशन एक्ट में 74वें संशोधन के कुछ सब्जेक्ट को छोड़ अन्य लागू हैं।
उन्होंने इस संशोधन में फायर, पीएचई, सिटी फारेस्ट सहित कुछ प्रावधान लागू नहीं हैं। इनके लागू होने से सभी कार्य के लिए एक चैनल स्थापित होगा। इससे पर्याप्त प्लानिंग के साथ काम होंगे और अतिरिक्त खर्च से भी बचा जाएगा।
जबकि डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा ने कहा कि सुनने में आया है फिलहाल दो साल तक नगर निगम में 74वां संशोधन लागू नहीं होगा। वर्तमान में जिस स्थिति में नगर निगम काम कर रहा है उसी स्थिति में करता रहेगा। भविष्य में इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। वहीं मेयर चंद्र मोहन गुप्ता का कहना है अभी हमारे पास कोई नोटिफिकेशन नहीं है। एलजी के शपथ लेने के बाद पता चलेगा कि क्या होने जा रहा है।