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Jammu Attack: 'मेरे बच्चे मार दिए... पर सुरंग में लोग फर्राटा जरूर भरेंगे'; एमडी बोले- हिम्मत नहीं हारेगा कोई

Tue, 22 Oct 2024 01:51 PM IST
शाहरुख खान रोली खन्ना, अमर उजाला, जम्मू

सार

मेरे बच्चे मार दिए, पर प्रोजेक्ट तैयार है, लोग फर्राटा जरूर भरेंगे। गांदरबल में एप्को टनल परियोजना पर काम करने वाली कंपनी के एमडी ने कहा कि ऐसी कायराना हरकत का जवाब देश जरूर देगा। अपने सात लोगों को खोकर कंपनी के 14 हजार से अधिक कर्मचारी सदमे में हैं, लेकिन हिम्मत कोई नहीं हारेगा।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वो डॉक्टर एक-दो नहीं... पता नहीं कितने लोगों की जिंदगी बचाता था। वे श्रमिक, जिन्हें भरे त्योहार पर मारा, देश के विकास को रफ्तार दे रहे थे। एक-दो नहीं बल्कि उन्होंने हमारे सात बच्चे मारे हैं। हमारी कंपनी के 14 हजार से अधिक कर्मचारी सदमे में हैं। मेरे बच्चों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। प्रोजेक्ट तैयार है, जल्द ही लोग उस पर फर्राटा भरेंगे।
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आक्रोश, सदमे और भावुकता से भरे ये शब्द हैं गांदरबल में एप्को टनल परियोजना पर काम कर रही कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अयोध्या निवासी अनिल सिंह के। उन्होंने कहा, ऐसी कायराना हरकत का देश जरूर जवाब देगा।

गांदरबल में आतंकी हमले के बाद अमर उजाला ने अनिल को फोन किया तो वह फफक पड़े। अनिल ने बताया कि 2014 में उन्होंने इस टनल प्रोजेक्ट का काम शुरू किया था। इतने वर्षों में घाटी में खुशहाली ने दोबारा कदम रखा था। 
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जिंदगी फिर से पटरी पर आ रही थी। लेकिन, 20 अक्तूबर ने हिला कर रख दिया है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। यह दिन स्मृतियों में हमेशा एक बुरी याद की तरह रहेगा। वह कहते हैं कि सोशल मीडिया से पता चला कि हमलावरों का कहना है कि अपनी जमीन पर काम नहीं करने देंगे। लेकिन, उन्हें पता होना चाहिए कि प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है और उद्घाटन के लिए तैयार है।

प्रोजेक्ट में काम करने वाले श्रमिकों को मेरे बच्चे कहकर संबोधित कर रहे अनिल कहते हैं कि हमारे बच्चों ने अपना बलिदान दे दिया, पर जाने से पहले काम पूरा कर गए। किसी के भी जीवन की कीमत पैसों से आंकी नहीं जा सकती है। पर हम मृतकों के परिवारों को 15-15 लाख रुपये की आर्थिक मदद दे रहे हैं।
 

25 हजार करोड़ की परियोजना लागत
इस टनल की लागत करीब 25 हजार करोड़ रुपये है। इसका बड़ा रणनीतिक महत्व है। यह जोजीला सुरंग के साथ ही श्रीनगर व कारगिल के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगी। इसके पूरा होने से श्रीनगर व लेह के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। वर्ष भर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन जारी रहेगा। इससे पर्यटन को बड़ी रफ्तार मिलने की संभावना है। अनिल सिंह ने बताया कि हमारा काम आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड में भी चल रहा है।
 

टारगेट किलिंगः गांदरबल के लोगों में दहशत कम आक्रोश ज्यादा
सियासत और आतंकी...हम क्या जाने कि क्या कारण है इन हमलों के पीछे। हमें तो सिर्फ अपनी पटरी पर लौटी जिंदगी में शांति से मतलब है। ये कहना है सरपंच अल्ताफ अहमद सूफी का। कहते हैं कि हमें 1987 का हमला याद है, जब बस को निशाना बनाया गया था। 

गांदरबल में रविवार को जो कुछ भी हुआ है, वो हम कश्मीरियों की जिंदगी फिर से बर्बाद करने की कोशिश है। आज एक भी टूरिस्ट की गाड़ी यहां से नहीं गुजरी। आम दिनों में सैकड़ों गाड़ियां फर्राटा भरती नजर आती थीं। यही वह रास्ता है जो अमरनाथ भी जाता है और लेह-लद्दाख भी। 




 
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आज जिस तरह से पर्यटकों की गाड़ियां यहां नहीं आईं, वो सन्नाटा कहीं हमारे भविष्य को खत्म न कर दे। हम सरकार से मांग करते हैं कि वो सख्त कार्रवाई करे। गांदरबाल के उद्यमी अमित रैना कहते हैं कि गैर कश्मीरियों को निशाना बनाने की ये कोशिश उनके गंदे इरादों का सबूत है। जब-जब हिंदू बसने लगते हैं, उन्हें उजाड़ने की कोशिश इसी तरह से की जाती है। 

केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाकर इस शुरुआत को रोकना होगा। निजी स्कूल में शिक्षक शबीर कहते हैं कि हमें तो जब ये खबर मिली तो समझ ही नहीं सके कि आखिर ये हुआ क्या है। मोदी जी, एलजी के शासन में तो यह मिलिटेंसी फ्री हो गया था क्षेत्र। हम सब खुद नहीं समझ पा रहे कि हो क्या रहा है। इतने दिनों की शांति के बाद इस तरह की घटना को अंजाम दिया जाने से हम सकते में हैं।
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