भद्रवाह के कैलाश कुंड से निकलते वक्त तवी का पानी स्वच्छ और पीने लायक होता है, लेकिन जम्मू में पहुंचते ही दूषित हो जाता है। इसकी पुष्टि जम्मू विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने की है। उन्होंने अध्ययन के बाद तवी बेसन पर शोध पत्र भी प्रकाशित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट में मानदंड तय किया है कि 6.5 से 8.5 तक पानी की मात्रा होगी तो इसे दूषित होने से बचाया जा सकता है। तवी का पानी अभी पूरी तरह से दूषित नहीं हुआ है।
बिक्रम चौक के पास नदी में पानी का एचसीओ-थ्री 220 मिलिमीटर प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि यह 600 से तक हो सकता है। भगवती नगर दूसरे स्थान पर है, जहां बायोकार्बोनेट 6.7 ग्राम पाया गया है।
इसके अलावा बाग-ए बाहू और शिथली लिफ्ट कैनाल से पानी की आपूर्ति भी की जाती है। इसमें भी कैल्शियम पाया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार बरसात में पानी ज्यादा दूषित हो रहा है। नगरोटा से लेकर भगवती नगर तक पानी ज्यादा दूषित हो रहा है। कचरा, पॉलिथीन फेंका जा रहा है। सर्फ और साबुन के मिश्रण से भी नदी का पानी दूषित हो रहा है। इसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। जलीय जीव-जंतु भी खतरे में हैं।
जम्मू विवि के भूगोल विभाग के विशेषज्ञ डॉ. सरफराज असगर ने कहा कि घरों से निकलने वाले कचरे को नदी नालों में न फेंके। इसका उचित निस्तारण करें। प्लास्टिक कचरे को अलग करें। उन्होंने कहा, अगर नदी-नालों के पानी को साफ रखा जाएगा तो मलेरिया सहित अन्य कई रोगों से बच सकते हैं।