जम्मू कश्मीर में पहाड़ी समुदाय को विधानसभा चुनाव से पहले अनुसूचित जनजाति का दर्जा सियासी गेम चेंजर साबित हो सकता है। प्रदेश के कुल बीस जिलों में से 13 जिलों में पहाड़ी आबादी है। राजोरी और पुंछ जिलों में तो कुल आबादी के आधे से ज्यादा पहाड़ी ही हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने पहाड़ी समुदाय को अपनी सूची में शामिल कर लिया है। ऐसे में एक से दो महीने में गृह मंत्रालय अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी करेगा। पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलना तय है।
पहाड़ी भाषी लोगों का विकास एवं सलाहकार बोर्ड ने 2011 की जनगणना के आधार पर पहाड़ी भाषी लोगों की रिपोर्ट तैयार की है। पहाड़ी भाषी लोगों की जनसंख्या रिपोर्ट के तहत जम्मू कश्मीर में पहाड़ी भाषी लोगों की कुल आबादी 1022982 है जोकि जम्मू कश्मीर की कुल आबादी का 8.16 फीसदी है।
जम्मू संभाग के पुंछ जिले में पहाड़ी भाषी लोगों की आबादी 267194 है जोकि जिले की कुल आबादी का 56 फीसदी है। राजोरी जिले में पहाड़ी भाषी लोगों की आबादी 360409 है जोकि जिले की कुल आबादी का 56.10 फीसदी है। शोपियां में 13427, श्रीनगर में 540, पुलवामा में 8920, कुपवाड़ा में 103082, कुलगाम में 3738, गांदरबल में 19494, बारामुला में 141157, बांदीपोरा में 16993, बडगाम में 5283, अनंतनाग जिले में 84742 आबादी पहाड़ियों की है।
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परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद जम्मू कश्मीर में सात विधानसभा सीटें बढ़ चुकी हैं और कुल सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो गई है। नौ सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रखी गई हैं। अब परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मतदाता सूचियों को तैयार करवाने का काम चुनाव आयोग कर रहा है। 25 नवंबर तक नई मतदाता सूचियां तैयार हो जाएंगी। ऐसे में अगले साल जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव तय हैं। चुनाव से पहले पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने से पार्टियों का सियासी गणित बदलना भी तय है।