माता वैष्णो देवी परिसर में हुई बर्फबारी के से भक्तों का उत्साह और बढ़ गया है। बर्फबारी को देखकर भक्तों के चेहरे खिल उठे हैं। उनके मन की दोहरी मुराद पूरी हो गई है। शनिवार को मौसम साफ होने से भवन की तरफ जाने वाले यात्रियों को राहत मिली है। बैटरी कार और रोपवे सेवा लगातार जारी है।
किश्तवाड़ जिले के उपमंडल पाडर में मचैल माता का दरबार मकर संक्रांति के बाद बैसाखी तक बंद हो जाएगा। माता चंडी के दरबार में स्थापित माता महाकाली की मूर्ति को हर वर्ष की भांति इस बार भी वहां से उठाकर स्थानीय निवासी पहलवान सिंह के घर की छत पर बने एक छोटे से मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। माता के दरबार में कई दिनों से रुक-रुक कर बर्फबारी जारी है। शुक्रवार को भी वहां बर्फबारी हुई। दंतकथाओं व मचैल निवासियों के अनुसार एक समय था कि लद्दाख के जंस्कार इलाके में कभी अकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।
तब बौद्ध धर्म के लोगों ने मचैल माता के दरबार में मन्नत मांगी थी कि इस इलाके में जब स्थिति सामान्य होगी तब यहां आकर माता चंडी के मंदिर में माता महाकाली की मूर्ति स्थापित करेंगे।
स्थिति सामान्य होने के उपरांत सभी बौद्ध धर्म के लोग माता महाकाली की मूर्ति लेकर मचैल पहुंचे तो बर्फबारी के चलते सभी लोगों को पहलवान सिंह के घर ही रुकना पड़ा। तब से यही परंपरा बनी हुई है कि मकर संक्रांति के दिन से बैसाखी तक माता की पूजा वहीं की जाएगी।