प्रदेश में स्कूल छोड़ चुके 93 हजार बच्चों की पहचान करने के बाद 40 हजार से अधिक को दोबारा स्कूलों में लाया गया है। अब उन्हें नए सिरे से स्कूली गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। समग्र शिक्षा ने दावा किया है कि गांवों में अभियान चलाकर और विशेष शिविर लगाकर इन बच्चों को स्कूलों में लाया गया है। तीन से 22 वर्ष तक आयु वर्ग में स्कूल छोड़ चुके या कभी स्कूल नहीं गए बच्चों की पहचान के लिए समग्र शिक्षा ने प्रदेश भर में तलाश सर्वे करवाया था।
समग्र शिक्षा परियोजना के निदेशक दीप राज ने कहा कि तलाश सर्वे में 93 हजार बच्चों की पहचान हुई थी। इनमें तीन से छह साल के बच्चों को स्कूल छोड़ चुके बच्चों की श्रेणी में शामिल नहीं किया है, क्योंकि इन बच्चों का दाखिला स्कूलों में करवाना ही है। सबसे ज्यादा बच्चे 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के थे, जिन्हें स्कूलों में नामांकित किया गया है। इसके साथ 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को नेशनल ओपन स्कूल के माध्यम से स्कूलों में लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 6 से 14 वर्ष आयु के बच्चे, जिन्हें स्कूल छोड़े चार से पांच वर्ष हो चुके हैं, उनकी आयु के अनुसार कक्षा में दाखिले के लिए पहले ब्रिज कोर्स करवाया जाएगा। यह कोर्स तीन, छह और नौ महीने का होगा। इस पूरी प्रक्रिया में छह महीने से एक साल तक का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि जोनल स्तर पर केंद्र बनाए जा रहे हैं, जहां स्कूल छोड़ चुके बच्चों को ब्रिज कोर्स करवाया जाएगा।
रामबन में सबसे ज्यादा 10 हजार बच्चे मिले
तलाश सर्वे में स्कूल छोड़ चुके बच्चों की सबसे ज्यादा 10 हजार संख्या रामबन जिले में दर्ज हुई थी। सबसे ज्यादा बच्चे ऐसे परिवारों से थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। स्कूल में शिक्षकों की उपलब्धता, घर से स्कूल की दूरी ज्यादा होना, पढ़ाई में कमजोर होना स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के सबसे बड़े कारण थे।