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Jammu Kashmir: चुनाव के बाद परिदृश्य बदला; 22 वर्षों में पहली बार सरकार में जम्मू का प्रतिनिधित्व न के बराबर

Fri, 11 Oct 2024 03:22 PM IST
निकिता गुप्ता अजय मीनिया, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में दस वर्ष बाद नई सरकार बनने जा रही है, लेकिन इसमें जम्मू संभाग की भागीदारी पिछले 22 वर्ष में सबसे कम होगी।
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Jammu Kashmir Election Result 2024 - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में दस वर्ष बाद नई सरकार बनने जा रही है। इसमें जम्मू संभाग की पिछले 22 वर्ष में सबसे कम भागीदारी होगी। जम्मू संभाग की बात करें तो इसमें भी दो हिस्से हो गए हैं। इनमें चार जिले ऐसे हैं जिनका कोई प्रतिनिधि सरकार का हिस्सा नहीं होगा। हालांकि नेकां के संभावित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि सरकार पूरे जम्मू-कश्मीर की होगी न कि किसी एक क्षेत्र की। इस पर राजनीतिक विशलेषक रेखा चौधरी कहती हैं कि सरकार क्या करती है, क्या नहीं करती। ये उनके फैसले होंगे और यह बाद की बात है। अहम यह है कि सरकार में सांबा, कठुआ, जम्मू और उधमपुर जैसे जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं होगा। यहां के दो विधायकों को छोड़कर बाकी सब भाजपा के हैं, जोकि सरकार का हिस्सा नहीं होंगे।
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वर्ष 2002 में कांग्रेस, पीडीपी और पैंथर्स पार्टी की सरकार बनी। पहले तीन वर्ष के लिए पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद और अगले तीन साल के लिए कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद सीएम बने। सरकार के साथ 19 विधायक जम्मू संभाग के थे जबकि मंत्रिमंडल में भी 8 से 10 मंत्री जम्मू संभाग के थे। इसके बाद 2008 में कांग्रेस, नेकां और पैंथर्स पार्टी की सरकार बनी। उमर अब्दुुल्ला 5 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे। सरकार के साथ जम्मू संभाग के 21 विधायक थे। सरकार में 8 से 10 मंत्री जम्मू संभाग के थे। वर्ष 2014 में पीडीपी और भाजपा की सरकार बनी। इसमें मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद 2016 तक और बाद में 2018 तक महबूबा मुफ्ती रहीं। मंत्रिमंडल में 8 से 10 मंत्री जम्मू संभाग के थे, जबकि 25 विधायक सरकार का हिस्सा थे। अब 2024 में नेकां और कांग्रेस सरकार बनाने जा रहे हैं। इसमें जम्मू संभाग के 10 से 11 विधायक सरकार का हिस्सा हाेंगे लेकिन मंत्रिमंडल में इक्का-दुक्का लोगों को ही जगह मिलने की उम्मीद है। ऐसे में पिछले 22 वर्ष में पहली बार होगा जब सरकार में जम्मू संभाग की हिस्सेदारी बहुत कम रह जाएगी। 

पहली बार इन जिलों का कोई प्रतिनिधि सरकार में नहींजम्मू संभाग के सांबा, कठुआ, उधमपुर और जम्मू जिला ऐसे होंगे जिनका एक भी प्रतिनिधि सरकार का हिस्सा नहीं होगा। जम्मू की 11 में 10 सीटों पर भाजपा, सांबा की तीनों सीटों, उधमपुर की चारों सीटों और कठुआ की छह में पांच सीटें भाजपा ने जीतीं हैं। सिर्फ जम्मू के छंब और कठुआ के बनी से निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं, जो नेकां को समर्थन दे चुके हैं।

पहले हर सरकार में रहा प्रतिनिधित्व
वर्ष 2002 और 2008 और 2014 में सांबा कठुआ उधमपुर और जम्मू को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला है। पूर्व में कांग्रेस के जम्मू के रमण भल्ला, योगेश साहनी, मूला राम, गारू राम चौधरी, सुमन भगत, मंगत राम, तारा चंद मंत्री रह चुके हैं। कठुआ से लाल सिंह, मनोहर लाल मंत्री रहे। भाजपा की तरफ से प्रिया सेठी, बाली भगत, लाल सिंह, चौधरी शाम, पवन गुप्ता, चंद्र प्रकाश गंगा, निर्मल सिंह मंत्री रह चुके हैं। 
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सरकार चाहे हित में काम करे, लेकिन बड़ी आवादी मंत्री विहीन रहेगी
परिणाम आने के बाद एक बुनियादी समस्या नजर आई है। जम्मू भी दो हिस्सों में बंट गया है। एक हिस्सा जम्मू, सांबा और कठुआ का मैदानी क्षेत्र का है। यहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और ये सरकार का हिस्सा नहीं होगी। इन क्षेत्रों के विधायक विपक्ष में बैठेंगे। दूसरा हिस्सा रामबन, किश्तवाड़, डोडा, राजोरी और पुंछ का है। यदि इन क्षेत्रों के विधायकों को मंत्री पद मिलता भी है तो ये अपने क्षेत्र पर ध्यान देंगे। ऐसे में जम्मू, सांबा, कठुआ और जम्मू के हिंदु बहुल क्षेत्र की बात रखने वाले तो होंगे लेकिन सरकार कितना मानेगी, उसी पर निर्भर होगा। रही बात जम्मू को नुकसान होने की तो इससे एक बड़ा गैप तो पड़ा है। ये भी सच है कि 2004 के बाद से आज तक जो सरकारें बनती आ रही थीं, उनमें जम्मू आधारित पार्टियां शामिल थीं, जो इस बार नहीं हैं।
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