डोगरी भाषा के कलाकार रोमालो राम जम्मू-कश्मीर के लोकनृत्यों मुख्य रूप से गीतड़ू व भाख को मंच पर प्रस्तुत करते हैं। उधमपुर जिले के रामनगर क्षेत्र के अमरोह गांव के रहने वाले रोमालो जोनल शिक्षा अधिकारी के पद से पिछले साल सेवानिवृत्त हुए हैं।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वीरवार को पद्म पुरस्कारों का एलान कर दिया गया। इसके तहत कला के क्षेत्र में जम्मू के रोमालो राम व कश्मीर के गुलाम नबी डार को पद्मश्री दिया गया है। जबकि लद्दाख के बौद्ध धर्मगुरु तोगदान रिनपोछे को मरणोपरांत अध्यात्म के क्षेत्र में पद्मभूषण दिया गया है।
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डोगरी भाषा के कलाकार रोमालो राम जम्मू-कश्मीर के लोकनृत्यों मुख्य रूप से गीतड़ू व भाख को मंच पर प्रस्तुत करते हैं। उधमपुर जिले के रामनगर क्षेत्र के अमरोह गांव के रहने वाले रोमालो जोनल शिक्षा अधिकारी के पद से पिछले साल सेवानिवृत्त हुए हैं। पढ़ाई के दौरान ही कक्षा नौंवीं से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोकनृत्यों के संरक्षण की खातिर विभिन्न स्थानों पर लोकनृत्यों की प्रस्तुति शुरू कर दी थी। वर्ष 2022 में उन्हें राज्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
श्रीनगर के रहने वाले गुलाम नबी डार लकड़ी पर नक्कशी करते हैं। 1984 में उन्हें राज्य पुरस्कार मिल चुका है। वह बॉक्स, पलंग, डाइननिंग टेबल तथा अन्य लकड़ी की चीजों पर कारीगरी करते हैं।
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तोगदान रिनपोछे बौद्ध अनुयायियों के बीच काफी प्रसिद्ध रहे हैं। लद्दाख के अलावा अन्य देशों व राज्यों में भी उनके अनुयायी रहे हैं। उनका निधन मई 2023 में लेह में हो गया था। मरणोपरांत उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।