इसमें आतंकी मदद, मवेशी तस्करी, नशा तस्करी जैसे अपराधों में शामिल लोगों पर आसानी से शिकंजा कसा जा सकेगा। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अपराधी को न्यायालय में पेश करने से पहले उसके फोटो और फिंगरप्रिंट लिए जा रहे हैं। इनको लैब में ऑनलाइन अपडेट किए जा रहा है। इसके लिए जम्मू सहित संभाग के सभी जिलों में थानेदारों को फिंगरप्रिंट स्कैनर मिल गया है। पुलिस इन फिंगरप्रिंट को जोड़ेगी। फिंगरप्रिंट लेने वाली पुलिस टीम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
नाम और पहचान बदलकर रहने वाले अपराधी भी पकड़ में आएंगे
अपराधी एक अपराध करने के बाद दूसरे जिलों या किसी भी स्थान पर नाम बदलकर रहने लगते हैं। वहां भी इसी तरह के अपराधों को अंजाम देते हैं। फिंगर प्रिंट संग्रहित होने के बाद अपराधी की यह चालबाजी भी नहीं चलेगी। फिंगरप्रिंट से पुराने नाम और पुराने अपराध की कुंडली भी पुलिस के सामने खुल जाएगी।
सभी जिलों में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) लैब शुरू की गई हैं। वहां काम हो रहा है। अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। - आनंद जैन, एडीजीपी, जम्मू जोन।