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Jammu Kashmir :  जम्मू-कश्मीर में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ, 370 बना था बाधा, पिछड़ा वर्ग को राहत

Thu, 07 Dec 2023 06:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

मंडल कमीशन की रिपोर्ट देश के अधिकतर राज्यों में लागू हो गई, लेकिन अनुच्छेद-370 की वजह से 27 फीसदी आरक्षण का फॉर्मूला यहां लागू नहीं हो सका।
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demo pic... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में पहली बार ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। मंडल कमीशन की रिपोर्ट देश के अधिकतर राज्यों में लागू हो गई, लेकिन अनुच्छेद-370 की वजह से 27 फीसदी आरक्षण का फॉर्मूला यहां लागू नहीं हो सका। इसके चलते पिछड़े वर्ग के लोगों ने लगातार अपने हित के लिए संघर्ष किया। अब मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पारित कर पिछले सात दशक से अधिक समय से जख्म लिए घूम रहे पिछड़े वर्ग के लोगों के जख्म पर मरहम लगाया है। हालांकि, इस आरक्षण का प्रतिशत कितना होगा, फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

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जम्मू-कश्मीर में  2011 की जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग की गणना नहीं हुई है, लेकिन अनुमान के मुताबिक यहां की कुल आबादी का 40 फीसदी से अधिक पिछड़ा वर्ग है। 1931 की जनगणना में इनकी आबादी 32 फीसदी बताई जाती है। प्रदेश में ओबीसी की जगह अन्य सामाजिक जातियां (ओएससी) हैं जो पूरे देश में कहीं भी नहीं है। अन्य जातियों में 28 जातियां हैं। जीडी शर्मा आयोग ने इसमें और 12 जातियों को जोड़ दिया। यदि ये जातियां शामिल हो गईं तो यहां 40 जातियां ओबीसी के अंतर्गत हो जाएंगी। 

ओएससी को पहले यहां दो फीसदी आरक्षण था, जिसे बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया गया है, जबकि देशभर में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण है। हालत यह है कि जम्मू-कश्मीर के बाहर इन्हें किसी प्रदेश की नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता है। केवल केंद्र सरकार की नौकरियों में ये आरक्षण का लाभ ले सकते हैं। यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय व पंचायती राज संस्थानों में भी उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं है। पिछड़े वर्ग से जुड़े लोगों का कहना है कि अपने प्रदेश में तो उन्हें यह सुविधा नहीं ही मिल रही है, अन्य राज्यों में भी उन्हें सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।
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अधिकार तिरंगा यात्रा से फिर करेंगे आवाज बुलंद
ओबीसी से जुड़े लोग फिर अधिकार तिरंगा यात्रा से अपनी आवाज बुलंद करेंगे। वे 27 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर 23 से 26 जनवरी तक कठुआ जिले के बसोहली व बिलावर में अधिकार तिरंगा यात्राएं निकालेंगे। 

विधानसभा में पांच सीटों पर होगा मनोनयन
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अब पांच सीटों पर मनोनयन होगा। इनमें दो सीटों पर महिलाओं का मनोनयन पहले की तरह होगा। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन अधिनियम के बाद और तीन सदस्य मनोनीत होंगे। इनमें दो कश्मीरी पंडित तथा एक पीओजेके का नुमाइंदा होगा। कश्मीरी पंडितों में से एक महिला होगी।

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