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जम्मू-कश्मीरः अर्से से उठ रही थी रोहिंग्याओं की वापसी की मांग, केंद्र ने साधे कई निशाने

Sun, 07 Mar 2021 03:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

  • पं. बंगाल चुनाव से भी जोड़ी जा रही रोहिंग्याओं पर कार्रवाई 
  • केंद्र ने चुनावी राज्यों में सख्ती और कथनी-करनी में फर्क न होने का दिया संदेश
  • रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए उठ रही मांग पर विरोधियों को दिया जवाब
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हीरानगर डिटेंशन सेंटर... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं पर कार्रवाई कर केंद्र सरकार ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश है। इस कार्रवाई को पश्चिम बंगाल, असम समेत चुनावी राज्यों में मतों के ध्रुवीकरण के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि सरकार रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों के खिलाफ सख्त है। उसकी कथनी-करनी में कोई फर्क नहीं है। साथ ही जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए उठ रही मांग पर विरोधियों का मुंह बंद करने की कोशिश बताई जा रही है क्योंकि यहां भी भविष्य में चुनाव होने हैं। 

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई केंद्र सरकार का स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई के समय को लेकर उंगली उठ सकती है। दरअसल भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई करने को शामिल किया था। पिछले दिनों संसद में इन्हें वापस भेजने का प्रस्ताव भी पारित किया गया, लेकिन तमाम कानूनी औपचारिकताओं के कारण यह संभव नहीं हो सका। 

दरअसल यहां रहने वाले रोहिंग्याओं ने यूएनएचआरसी का परिचय पत्र हासिल किया हुआ है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में आने के बाद अवैध रूप से स्टेट सब्जेक्ट, वोटर आईकार्ड, राशन कार्ड व आधार कार्ड भी बनवाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई रोहिंग्या तो बिजली बिल भी चुकाते हैं। 2017 में एक रोहिंग्या के पास से स्टेट सब्जेक्ट, आधार कार्ड मिलने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया था। इस परिवार के सात सदस्यों के नाम भी राशन कार्ड पर दर्ज थे। 
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सुरक्षा के लिए खतरा बता चुकी है केंद्र सरकार
केंद्र सरकार की ओर से रोहिंग्याओं को सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा भी बताया गया था। तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इन्हें सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए बायोमीट्रिक डाटा बेस तैयार करने को कहा था। इनके पाकिस्तानी आतंकी संगठन और आईएसआई से भी संपर्क होने की आशंका जताई गई थी। सैन्य प्रतिष्ठानों के आस पास के इलाकों में भी रोहिंग्याओं की बस्तियां को लेकर खतरा बताया जाता रहा है। सुंजवां में सैन्य प्रतिष्ठान से कुछ दूरी पर 48 रोहिंग्या परिवारों के 206 लोग, जबकि नगरोटा में 16 कोर मुख्यालय के  इलाके में करीब 250 रोहिंग्या रहते हैं।

पूरी तैयारी के बाद कार्रवाई
रोहिंग्याओं पर पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई की गई। यह कवायद पिछले कुछ दिनों से चल रही था। हीरानगर उप जेल से कैदियों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही रोहिंग्याओं को भेजने का फैसला किया गया। दो दिनों तक हीरानगर से कैदियों को जम्मू की जेल में शिफ्ट किया गया। इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद सुरक्षा की समीक्षा की गई। जेल की सुरक्षा बढ़ाने के बाद रोहिंग्याओं को वहां भेजने की कार्रवाई शुरू की गई।

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