श्रीनगर। नेकां प्रवक्ता तनवीर सादिक ने रविवार रात एक्स पर एक पोस्ट में कहा, छुट्टियों की सूची और यह निर्णय भाजपा द्वारा कश्मीर के इतिहास और लोकतांत्रिक संघर्ष की अनदेखी को दर्शाता है।
सदीक ने कहा, उम्मीद थी कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती और शहीदी दिवस को छुट्टियों में शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा न होने से हमारे इतिहास और धरोहर की महत्ता कम नहीं होती। ये छुट्टियां एक दिन बहाल होंगी।
13 जुलाई को जम्मू और कश्मीर में एक सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता था, जो 1931 में डोगरा महाराजा के सैनिकों की गोलीबारी में मारे गए 23 शहीदों को समर्पित था। 5 दिसंबर को शेख अब्दुल्ला की जयंती के रूप में भी एक सार्वजनिक अवकाश होता था।
यह फैसला जम्मू-कश्मीर के लोगों का अपमान : तारिगामी
सीपीआई (एम) के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला एक महान शख्सियत थे। जम्मू-कश्मीर के स्वतंत्रता संग्राम और जनता के सशक्तीकरण में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसी महान शख्सियत को कमतर आंका जाना इतिहास की विकृति है। प्रशासन ने इस तरह के फैसले लेकर जम्मू और कश्मीर के लोगों का अपमान किया है।
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