महर्रम के जुलूस में शामिल शिया समुदाय के लोग।
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श्रीनगर। मुहर्रम के 10वें दिन यौमे आशूरा के अवसर पर श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके बोटाकदल से इमामबाड़ा जडीबल तक ज़ुल्जिना का जुलूस निकाला गया। रविवार सुबह घाटी के अन्य हिस्सों से आज़ादार बोटाकदल इलाके में एकत्रित होना शुरू हुए।
यहां से मातमी जुलूस इमामबाड़ा जडीबल की ओर बढ़ना शुरू हुआ। जुलूस में एलजी मनोज सिन्हा, आईजीपी कश्मीर ज़ोन वीके विर्दी, डीसी अक्षय लाबरू और एसएसपी संदीप चक्रवर्ती के अलावा पुलिस और प्रशासन के अन्य आला अधिकारी मौजूद रहे। आशूरा पैगंबर मुहम्मद के पोते हजरत इमाम हुसैन की शहादत की सालगिरह का प्रतीक है जो लगभग 1400 साल पहले अपने परिवार के सदस्यों और साथियों के साथ इराक के कर्बला में शहीद हुए थे।
प्रशासन ने बोटाकदल से इमामबाड़ा जडीबल तक जुलूस के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्था की थी। इसके अलावा जुलूस के दौरान धार्मिक सद्भाव की कई मिसालें देखने को मिली। एक सिख युवक भी इस जुलूस में शामिल आज़ादारों को पानी बांटते हुए नज़र आया। स्थानीय लोगों के अनुसार हम सब भाईचारे का संदेश देना चाहते हैं और चाहते हैं सब धर्मों के लोग यहां अमन और शांति में रहे।
जुलूस के दौरान आज़ादारों को धार्मिक नारे लगाते और हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मर्सी करते देखा गया। कड़े सुरक्षा घेरे के बीच जुलूस निकाला गया। इस दौरान आज़ादारों ने कहा कि वह बेहद खुश हैं कि सरकार ने कुछ वर्षों से लगातार जुलूस को लेकर गंभीरता दिखाई और खुद भी कई अधिकारी इसमें शामिल हुए। जुलूस में मौजूद आज़ादारों ने मुहर्रम के प्रबंधों को लेकर दिखाई गई गंभीरता को लेकर प्रशासन की काफी सरहाना की। जुलूस को ध्यान में रखते हुए पहले से ही ट्रैफिक पुलिस द्वारा एडवाइजरी जारी की गई थी। यह जुलूस आखिर में जडीबल के इमामबाड़ा में संपन्न हुआ।