फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: नारानाग से 17वीं वार्षिक गंगबल यात्रा हुई रवाना

विज्ञापन
विज्ञापन
गांदरबल। 17वीं वार्षिक गंगबल यात्रा जिसे ''''कश्मीर का कैलाश'''' भी कहा जाता है शनिवार को मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के नारानाग में ध्वजारोहण समारोह के साथ शुरू हुई। यह यात्रा तीर्थयात्रियों को हरमुख पर्वतमाला में 14,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित हरमुख गंगबल झील तक ले जाती है। 150 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही यात्रा दशकों तक बंद रहने के बाद 2009 में दोबारा से शुरू की गई। इस तीर्थयात्रा का आयोजन विनोद पंडित के नेतृत्व वाले हरमुख गंगा गंगबल ट्रस्ट (एचजीजीटी) द्वारा किया जाता है। दोबारा शुरू होने के बाद से यह यात्रा बिना किसी रुकावट के प्रतिवर्ष आयोजित की जाती रही है।
विज्ञापन

यात्रा नारानाग में छड़ी पूजा समारोह के साथ शुरू हुई। इस कार्यक्रम में कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग, गांदरबल के जिला उपायुक्त जतिन किशोर, गांदरबल के एसएसपी खलील पोसवाल, 2 असम राइफल्स और सीआरपीएफ के अधिकारी और कंगन के एसडीएम उपस्थित थे। तीन दिवसीय वार्षिक गंगबल यात्रा बड़े ही धार्मिक उत्साह के साथ शुरू हुई और इसे डिवकॉम अंशुल गर्ग ने नारानाग मंदिर से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा के बारे में बोलते हुए मंडलायुक्त अंशुल गर्ग ने कहा कि स्थानीय समुदाय ने गंगबल यात्रा को पुनर्जीवित करने और जारी रखने में निरंतर भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी पुलिस और सेना तीर्थयात्रा को सुगम बना रही है। उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व वाली सहायता टीम और त्रिंगपुल में तैनात सैन्य कर्मियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी पूरे कश्मीर में ऐसी तीर्थयात्राएं जारी रहेंगी।
विज्ञापन

आयोजकों और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और नारानाग के स्थानीय समुदाय के प्रति उनके अमूल्य सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया जिन्होंने तीर्थयात्रा के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विनोद पंडिता ने कहा कि यहां हर तरह के प्रबंध किये गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अलावा स्थानीय सहयोग भी है। उन्होंने बताया कि पवित्र अनुष्ठान गंगबल झील के तट पर किए जाएंगे जिसके बाद तीर्थयात्री अगले दिन लौट जाएंगे।
बाहर से आई गुंजन रैना ने कहा, मैं एक कश्मीरी पंडित हूं और 35 साल से कश्मीर से बाहर हूं। हम इस यात्रा के लिए आए हैं जो काफी पुरानी यात्रा है और 150 सालों से चलती आई है। ये यात्रा पिछले कुछ वर्षों से दोबारा शुरू हो चुकी है। इसका बहुत महत्व है कश्मीरी पंडितों के लिए। जो हरमुख पहाड़ है उसे कश्मीर का कैलाश कहा जाता है। हमारे लिए काफी पवित्र यात्रा है। यहां सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं और स्थानीय लोगों का भी सहयोग है। उम्मीद करते हैं कि यह यात्रा सुखमय रहेगी। बता दें, इस वर्ष यात्रा में 55 श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें