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Jammu News: ‘इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हुआ पहली कश्मीरी युवती सीरत का नाम

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‘इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’’ के साथ बांदीपोरा की सीरत ​तारिक। स्रोत : स्वयं। - फोटो : mathura
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बांदीपोरा। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले की छात्रा सीरत तारिक (19) चित्रकला और कलात्मक लेखन शैली में अपनी असाधारण प्रतिभा की बदौलत ‘इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराकर पहली कश्मीरी लड़की बन गई है। उनके कलात्मक लेखन शैली (कैलीग्राफी) और रचनात्मक चित्रकला शैलियों के संगम ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। सफलता का श्रेय माता-पिता को देने वाली स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा सीरत की इस उपलब्धि ने बांदीपोरा के साथ ही पूरी कश्मीर घाटी को गौरवान्वित किया है।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान सीरत ने बताया कि चार अगस्त 2025 को राजस्थान के जयपुर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक समारोह के दौरान यह रिकॉर्ड बनाया। बताया कि इस कार्यक्रम के लिए मैंने कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती और आदिवासी कला से प्रेरित एक कलाकृति भी बनाई। मेरी दोनों तस्वीरों को सर्वश्रेष्ठ कृति के रूप में चुना गया। 17 अगस्त को जयपुर स्थित इंटरनेशनल सेंटर में ‘इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सीरत कहती हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान मिलेगी। बताया कि सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही पेंटिंग करने का जो एक साधारण शौक था, वह धीरे-धीरे एक जुनून में बदल गया। उन्होंने चित्रकला का कोई औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है। वह अपने माता-पिता खासकर मां को अपनी कलात्मक यात्रा में निरंतर प्रेरणा का स्रोत मानती हैं। कहती हैं कि यह सम्मान वैश्विक कला और रचनात्मक मंचों पर कश्मीरी युवाओं की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाने के क्रम में एक मजबूत कदम है।
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अब गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड है लक्ष्य
इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड, इंटरेनशनल बुक ऑफ रिकार्ड के बाद ‘इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ का खिताब अपने नाम करने वाली सीरत तारिक के फेसबुक पर पांच हजार से अधिक फालोअर हैं। कहती हैं कि अब उनका अगला लक्ष्य गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराना है। इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। बताती हैं कि वह अपनी पेंटिंग में अधिकतर कश्मीर की संस्कृति और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ी कला कृतियों को ही बनाने में रुचि रखती हैं। ऐसा इसलिए ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर और कश्मीरियों को लोग सकारात्मक नजरिये से भी देखें।
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