श्रीनगर। भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय ने रिश्वत के मामले में दो आरोपियों को शनिवार को सजा सुनाई। पहले मामले में पुलवामा कोर्ट ने 2008 के मामले में आरोपी गिरदावर (लेखपाल) गुलाम हसन कुमार को चार साल छह माह की जेल के साथ ही जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी तरह दूसरे मामले में अनंतनाग न्यायालय ने 2009 के जालसाजी मामले में बीडीओ कार्यालय में तत्कालीन कनिष्ठ सहायक हबीबुल्लाह कुमार को दोषी ठहराते हुए दो साल की जेल और जुर्माने की सजा दी है। वहीं श्रीनगर कोर्ट में 2023 में दर्ज हुए रिश्वत के एक प्रकरण में आरोपी आशिक हुसैन मलिक तत्कालीन पटवारी हलका शरीफाबाद एचएमटी श्रीनगर के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया गया। सुनवाई आठ अक्तूबर को होगी।
भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय पुलवामा के न्यायाधीश डॉ. नूर मोहम्मद मीर ने कुलगाम के तारिगाम देवबग निवासी गुलाम हसन कुमार को दोषी ठहराते हुए तहत तीन साल छह महीने के साधारण कारावास और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। आरपीसी की धारा 161 के तहत एक वर्ष के साधारण कारावास और दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। भुगतान नहीं करने पर एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास और भुगतना होगा। दर्ज एफआईआर 22/2008 के मुताबिक तत्कालीन गिरदावर के रूप में कार्यरत आरोपी ने 16 जून 2008 को शिकायतकर्ता से 18 कनाल और 18 मरला ज़मीन का सीमांकन करने के बदले दो हजार रुपये रिश्वत लिया था।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय अनंतनाग मसरत रूही ने लरकीपोरा के खंड विकास कार्यालय में तैनात रहे तत्कालीन कनिष्ठ सहायक हबीबुल्लाह कुमार को रिश्वत मामले में दोषी ठहराया। आरोपी को 21,000 रुपये के जुर्माने के साथ दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा मिली। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दर्ज एफआईआर 25/2009 के मुताबिक शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसे और उसके पांच अन्य सहायकों को, जो बीडीओ कार्यालय लरकीपोरा में तैनात थे 1 नवंबर 2008 से प्रभावी रूप से पदोन्नति प्रदान की गई थी। बकाया बिल तैयार करने के लिए आरोपी ने 1,800 रुपये रिश्वत लिया था।
शरीफाबाद के पूर्व पटवारी आशिक हुसैन के खिलाफ आरोप पत्र पेश
जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पुलिस स्टेशन एसीबी श्रीनगर में दर्ज एफआईआर संख्या 21/2023 में आरोपी आशिक हुसैन मलिक तत्कालीन पटवारी हलका शरीफाबाद एचएमटी श्रीनगर के खिलाफ अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय श्रीनगर के समक्ष रिश्वतखोरी के मामले में शनिवार को आरोप पत्र पेश किया। आरोप है कि आशिक हुसैन मलिक ने राजस्व के जमाबंदी ऑनलाइन दस्तावेजों में आवश्यक प्रविष्टि करने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। एसीबी ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। मामले में अगली सुनवाई आठ अक्तूबर को होगी।