श्रीनगर। क्रिकेट बैट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (सीबीएमएके) ने हस्तशिल्प की नई अधिसूचित सूची में प्रतिष्ठित ‘कश्मीर विलो क्रिकेट बैट’ को शामिल करने का स्वागत किया है। साथ ही इसके लिए केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के हथकरघा और हस्तशिल्प विभाग का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल घाटी भर के बैट निर्माताओं और कारीगरों को लाभ होगा बल्कि इस पारंपरिक शिल्प के दीर्घकालिक विकास में भी योगदान मिलेगा। बैट निर्माता अब राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (सीएचसीडीएस) के तहत योजनाओं और कल्याणकारी उपायों का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, यह आदेश कारीगरों के लिए पहचान पत्र जारी करने और नवीनीकरण की सुविधा प्रदान करता है जिससे सरकारी सहायता, प्रोत्साहन और प्रशिक्षण तक उनकी पहुंच में सुधार होता है।
सीबीएमएके के प्रवक्ता और उपाध्यक्ष फवजुल कबीर ने कहा, हम भारत सरकार और जम्मू कश्मीर के हथकरघा और हस्तशिल्प विभाग के प्रति बेहद आभारी हैं जिन्होंने जम्मू कश्मीर के प्रसिद्ध कश्मीर विलो क्रिकेट बैट बनाने में शामिल शिल्प कौशल को मान्यता दी है। यह मान्यता हमारे कारीगरों के लिए नए रास्ते खोलेगी, वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्लेटफार्मों पर हमारे उत्पादों को बढ़ावा देगी। हम इस समय पर हस्तक्षेप के लिए कपड़ा मंत्रालय को धन्यवाद देते हैं जो संसाधनों तक बेहतर पहुंच को सक्षम करेगा और हमारी विरासत को मजबूत करेगा।
कश्मीर क्रिकेट बैट उद्योग जो मुख्य रूप से अनंतनाग और पुलवामा जिलों में स्थित है, 400 से अधिक विनिर्माण इकाइयों का घर है और हजारों कुशल कारीगरों की आजीविका का साधन है। ये कारीगर स्थानीय रूप से प्राप्त कश्मीर विलो को प्रीमियम-गुणवत्ता वाले बल्ले में बदलते हैं, जिन्हें उनके शिल्प कौशल के लिए वैश्विक मान्यता मिली है। यह क्षेत्र न केवल स्थानीय रोजगार में योगदान देता है, बल्कि खेल के साथ कलात्मकता को मिलाकर सदियों पुरानी परंपरा को संरक्षित करने में भी मदद करता है।