बांदीपोरा। पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हुई, के बाद जम्मू-कश्मीर में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार ने 2010 की पुनर्वास नीति के तहत कश्मीर आए पूर्व उग्रवादियों से शादी करने वाली पाकिस्तानी महिलाओं के मामलों की समीक्षा शुरू की है, जो अब स्थायी रूप से यहां बसना चाहती हैं। हमले के बाद, इनमें से कई महिलाएं, जो एक दशक से अधिक समय से कश्मीर में रह रही हैं, ने सरकार से मानवीय आधार पर उन्हें रहने की अनुमति देने की अपील की है।
उनका तर्क है कि उन्होंने यहां अपना जीवन बना लिया है, परिवार बढ़ाया है और समाज में योगदान दिया है। मुजफ्फराबाद की रहने वाली एक महिला, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की इच्छा जताई, ने कहा, मैंने पिछले स्थानीय निकाय चुनाव में वोट डाला था, और मेरे तीन बच्चे यहीं पैदा हुए हैं। उनके पास डोमिसाइल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड और सभी जरूरी दस्तावेज हैं। अब हम कहां जाएं, उनकी आवाज़ में उखड़ने का डर साफ झलक रहा था।
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा मेरे तीन बच्चे हैं, मैं उनके साथ कहां जाऊं? मैं यहां रहना चाहती हूं और शांति से जीवन जीना चाहती हूं। एक अन्य महिला ने बताया कि स्थानीय प्रशासन से उन्हें वापसी की तैयारी करने के लिए कॉल आया है। मैं पिछले 15 साल से यहां रह रही हूं। यह वही जगह है जहां मेरी आत्मा को सुकून मिलता है। मेरे बच्चे यहां रहते हैं, यह फैसला हमारी जिंदगी बर्बाद कर देगा।
इनमें से कई महिलाओं का कहना है कि उनका उग्रवाद से कोई संबंध नहीं है और वे कश्मीरी समाज में पूरी तरह घुल-मिल गई हैं। वे मां, शिक्षक और छोटे व्यवसायों की मालिक के रूप में सामान्य जीवन जी रही हैं। इस नई जांच ने कश्मीर में मानवीय चिंताओं बनाम सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर बहस छेड़ दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने का आग्रह किया है और चेतावनी दी है कि एकतरफा कार्रवाइयों से परिवारों को मानवीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, सरकार ने जिला प्रशासन को घाटी में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों का विस्तृत विवरण तैयार करने का आदेश दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि जल्द ही और कार्रवाई हो सकती है। संवाद