पुरमंडल। महाशिवरात्रि को लेकर पुरमंडल में तैयारियां जोरों पर हैं। पुरमंडल मंदिर को छोटा काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित मंदिर है। जम्मू शहर से लगभग 30 किमी की दूरी पर देवक नदी के तट पर स्थित मंदिर में कई शिवलिंग हैं। बताया जाता है कि ये शिवलिंग प्राकृतिक रूप से उत्पन्न हुए हैं। इन्हें स्थानीय भाषा में आप शंभू कहा जाता है।
मान्यता है कि भगवान शिव के कहने पर माता पार्वती यहां गुप्ता गंगा के रूप में प्रकट हुई थीं। इसके बाद महाराजा गुलाब सिंह ने यहां 108 मंदिर बनवाए थे और हर मंदिर में 11 शिवलिंग स्थापित किए थे।
ऐतिहासिक शिव मंदिर में एक शिव कुंड भी है। यहां पर लोग जल चढ़ाते हैं लेकिन यह जल कुंड भरता नहीं है। इस मंदिर में चौबीसों घंटे ज्योति जलती रहती है। शिवरात्रि के दौरान तीन दिनों तक पुरमंडल में मेला लगता है।
इस मंदिर परिसर में भगवान गणेश की प्रतिमा है, जोकि दिल्ली के सिद्धिविनायक मंदिर के बाद पुरमंडल में देखने को मिलती है। गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई है। इस मंदिर में दीवारों पर बने भित्ति चित्रों में भगवान शिव, देवी पार्वती, गणेश आदि की आकृतियां बनी हुई हैं।
ऐतिहासिक शिव मंदिरों को सजाने का काम जोरों पर
पुरमंडल। महाशिवरात्रि के पावन पर्व को लेकर पुरमंडल स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिरों को सजाने का काम जोरों पर चल रहा है। रंग रोगन और लाइटें लगाने का कार्य चल रहा है।
शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर शिव बरात निकाली जाएगी। इसमें भगवान शिव-पार्वती के जीवन पर आधारित झांकियां निकाली जाएंगी। पंडित आनंद किशोर शर्मा, मिंटू शर्मा ने बताया कि पुरमंडल में शिवरात्रि के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी हर्षोल्लास से मनाने की तैयारियां चल रही हैं।
शिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिर में लोग चार पहर की पूजा करते हैं। खास कर आप शंभू मंदिर में पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसमें स्थानीय लोगों के अतिरिक्त हजारों की संख्या में लोग इन मंदिरों में दूर-दूर से आते हैं। रात भर जागरण और भंडारे का आयोजन होता है।