सरकारी योजनाओं से वंचित रहने के कारण उपेक्षा का शिकार हुआ धरोहर तालाब
स्थानीय लोगों ने उठाई पुनर्निर्माण की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। उत्तरवाहिनी देविका तट पर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी पुरमंडल के समीप लगभग 250 वर्ष पुराना प्राचीन तालाब आज बदहाली की स्थिति में पहुंच चुका है। कभी क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं की जल आवश्यकताओं को पूरा करने वाला यह तालाब अब झाड़ियों, गाद और उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। लोगों ने प्रशासन से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण एवं पुनर्निर्माण की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार डोगरा शासकों के समय मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस तालाब का निर्माण करवाया था। उस समय यह तालाब क्षेत्र का प्रमुख जलस्रोत हुआ करता था। मंदिरों में पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों और दैनिक उपयोग के लिए तालाब के जल का प्रयोग किया जाता था। इसके अलावा यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी इस तालाब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई दशकों से यह ऐतिहासिक तालाब उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। समय-समय पर सरकार की ओर से पुराने तालाबों, बावलियों और कुओं के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई गईं। करोड़ों रुपये खर्च कर कई जलस्रोतों का पुनरुद्धार किया गया, मगर इस ऐतिहासिक धरोहर की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप तालाब की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती चली गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब में झाड़ियां उग आई हैं। जल निकासी व्यवस्था भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है और चारों ओर गंदगी का माहौल बना हुआ है। इसके कारण न केवल इसकी ऐतिहासिक पहचान प्रभावित हो रही है बल्कि क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन महत्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
स्थानीय समाजसेवी, वरिष्ठ नागरिकों और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने बताया कि यदि समय रहते इस तालाब का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां क्षेत्र की इस ऐतिहासिक धरोहर से वंचित हो जाएंगी। उनका कहना है कि तालाब के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण से जहां ऐतिहासिक विरासत को बचाया जा सकेगा। वहीं धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्षेत्र के प्रमुख नागरिकों ने जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस प्राचीन तालाब का सर्वेक्षण कराकर इसके संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए विशेष योजना तैयार की जाए। साथ ही तालाब की सफाई, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह तालाब केवल एक जलस्रोत नहीं बल्कि क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। इसके संरक्षण से न केवल पुरमंडल की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी।