जंगली जानवरों और लावारिस कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता
स्कूलों में घट रही विद्यार्थियों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। सरकारी स्कूलों में चारदीवारी न होने के कारण नौनिहालों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इससे अभिभावकों को रोजाना चिंता का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से समस्या का समाधान करने की मांग की है।
लोगों के अनुसार प्राइमरी स्कूल नंदक, रख चिरक, मेगानाला और सदारल सहित कई स्कूल ऐसे हैं जहां आज तक चारदीवारी का निर्माण नहीं हो पाया है। इससे स्कूल परिसर में जंगली जानवरों और लावारिस कुत्तों के आने का खतरा रहता है। लोगों का कहना है कि छोटे बच्चे स्कूल परिसर में पढ़ाई और खेल गतिविधियों के दौरान असुरक्षित महसूस करते हैं।
अभिभावकों ने कहा कि यदि समय रहते इन स्कूलों में चारदीवारी की व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द चारदीवारी का निर्माण करवाया जाए। लोगों ने बताया कि क्षेत्र के कई सरकारी प्राइमरी स्कूल मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से भरोसा कम होता जा रहा है। विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। हालात यह हैं कि क्षेत्र के आधा दर्जन स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
स्थानीय लोगों ध्यान सिंह, गोविंद राम शर्मा, स्वर्ण सिंह जोगिंदर शर्मा और राजेश कुमार का कहना है कि गरीब परिवारों के बच्चे मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर रहते हैं। सुविधाओं के अभाव के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने सरकार और शिक्षा विभाग से शिक्षा क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया को तेज करने और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर विशेष ध्यान देने की मांग की है।
कोट
इन स्कूलों में अभी तक चारदीवारी नहीं हो पाई है। उम्मीद है कि चरणबद्ध तरीके से चारदीवारी का काम हो रहा है और यह उच्च अधिकारियों के स्तर की बात है।
-परमजीत सिंह, जोनल शिक्षा अधिकारी