पुरमंडल। कस्बे में वर्षों से बंद पड़े सरकारी प्राइमरी स्कूलों की इमारतें खंडहर हो रही हैं। शिक्षा जोन पुरमंडल के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी प्राइमरी स्कूलों के भवन वर्षों से बंद पड़े हुए हैं।
स्थानीय लोगों हेम राज शर्मा, पूर्व पंच गिरधारी लाल, राजेश कुमार, गोबिंद राम शर्मा, कुलदीप सिंह, राकेश कुमार, जोगिंदर कुमार, स्वर्ण सिंह ने बताया कि इन स्कूलों में प्राइमरी स्कूल बालादेव, प्राइमरी स्कूल डिगेड, प्राइमरी स्कूल गुरगाणी, प्राइमरी स्कूल रजोली, प्राइमरी स्कूल मंडी खुई, पेखड़ी और नथवाल आदि शामिल हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकार की तरफ से करोड़ों रुपए खर्च करने के उपरांत भी इनका लोगों को कुछ फायदा नहीं मिल रहा है। लोगों के मुताबिक प्राइमरी स्कूल दीओन और प्राइमरी स्कूल रजोली के भवन अभी निर्माणाधीन हैं जिन का निर्माण कार्य पिछले 12 वर्षों से रुका पड़ा है। करोड़ों रुपए खर्च हो चुका है, लेकिन उनका कोई निष्कर्ष नहीं निकल रहा है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि बंद पड़े स्कूलों के गांव के बच्चे 3 किलोमीटर पैदल सफर करके दूर दूसरे स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। इससे उन बच्चों को आने जाने में परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इन बंद बड़े स्कूलों के लिए जिन लोगों ने अपनी भूमि दान की थी, अगर सरकार चाहे तो इन स्कूलों के भवन उनको भी सौंप सकती है, ताकि वे इन भवनों की देखरेख कर सकें।
स्थानीय लोगों ने मांग की कि इन बंद पड़े भवनों में ग्राम स्तर के सरकारी कार्यालयों को स्थानांतरित किया जाए। आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक उपचार केन्द्र आदि किराये के भवनों में चल रहे हैं।
कोट
जिले में लगभग 85 के करीब स्कूल थे, जो इस पॉलिसी के अंतर्गत बंद किए गए थे। कोड अब बंद हो चुके हैं अगर लोग दोबारा किसी स्कूल को खोलने की मांग करते हैं तो इसके लिए प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। आगे की कार्रवाई जिला विकास आयुक्त के हाथ में होती है। 75 के करीब स्कूलों के भवन अलग-अलग विभागों को दे दिए गए हैं। इसकी जानकारी जिला विकास आयुक्त को दे दी गई है। आगे का निर्णय उन्होंने लेना है।
-केवल कृष्ण, सीईओ सांबा