सांबा। जिले में इन दिनों धान की रोपाई का कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है। हाल ही में हुई बारिश के बाद किसान खेतों में धान की रोपाई में जुट गए हैं। इस बार भी अधिकांश किसान बासमती की बजाय मोटे परमल धान की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि परमल धान करीब 110 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे फसल समय पर पक जाती है और बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से नुकसान की संभावना कम रहती है। इसके अलावा मंडियों में भी परमल धान का अच्छा मूल्य मिलने से किसानों को बेहतर आमदनी हो रही है।
किसान दविंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने बासमती धान की खेती लगभग बंद कर दी है। केवल घरेलू जरूरत के लिए थोड़ी-बहुत बासमती लगाते हैं जबकि बाकी खेतों में परमल धान की रोपाई करते हैं और तैयार फसल मंडी में बेच देते हैं।
वहीं किसान मुकेश कुमार, नरेश कुमार, राजेंद्र, प्रेम, खेम राज ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से मोटे परमल धान की खेती कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा मिला है। उनका कहना है कि परमल धान की ऊंचाई कम और तना मजबूत होता है, जिससे तेज हवा और बारिश में फसल गिरने का खतरा कम रहता है। एक कनाल भूमि से लगभग 4 से 5 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो जाता है।
कृषि विभाग के शाम लाल शर्मा के अनुसार इस वर्ष सांबा जिले में लगभग 800 हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे परमल धान की खेती की जा रही है। विभाग का मानना है कि बेहतर उत्पादन, कम जोखिम और अच्छे बाजार भाव के कारण किसानों का रुझान लगातार परमल धान की ओर बढ़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार कि तीन साल पहले 500 हेक्टेयर में ही मोटे धान की खेती होती थी अब धीरे धीरे किसानों का रूझान बढ़ रहा है। उन के अनुसार कि राजपुरा में धान खरीद केंद्र के खुलने से किसानों को सुविधा मिली है।