सांबा। जिले भर के किसान बेमौसमी बारिश से परेशान हो गए हैं। गेहूं की तैयार फसल को बारिश नुकसान पहुंचा रही है। किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है और केसीसी पर लिए ऋण को माफ करने की मांग उठाई है।
सीमावर्ती पंचायत लगवाल के गांव बरोटा के किसान प्रेम पाल, किसान मोहन लाल, किसान तरसेम सिंह, बचन लाल ने बेमौसमी बारिश और बदलते मौसम के कारण भारी नुकसान होने की शिकायत करते हुए सरकार से तुरंत राहत देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल पक चुकी थी और साफ मौसम की जरूरत थी लेकिन लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने पूरी फसल को जमीन पर गिरा दिया है।
किसानों ने बताया कि जब बारिश की जरूरत होती है, तब सूखा पड़ जाता है और जब फसल कटाई के लिए तैयार होती है तब बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। इस कारण खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और स्प्रे के खर्चे कई गुना बढ़ चुके हैं लेकिन फसलों के दाम वहीं के वहीं हैं। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
बारिश जारी रही तो नुकसान 80 फीसदी तक पहुंच सकता है
किसानों के अनुसार कई खेतों में गिरी हुई फसल जमीन से चिपक गई है और दाने दोबारा अंकुरित होने लगे हैं। यदि बारिश जारी रही तो 70 से 80 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने बताया कि इस सप्ताह तक ही करीब 50 प्रतिशत नुकसान हो चुका है और लगातार बारिश से पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा है।
एक किसान ने कहा कि उन्होंने उधार लेकर खाद और बीज खरीदे थे। उम्मीद थी कि फसल आने पर कर्ज चुका देंगे लेकिन अब फसल खराब होने से वे आर्थिक संकट में आ गए हैं। किसानों ने यह भी बताया कि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के तहत लिया गया कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया है जबकि बैंक ब्याज और मूलधन की मांग कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पहले सरकार की ओर से मुआवजा मिलता था, लेकिन अब मामला बीमा कंपनियों पर छोड़ दिया गया है, जो अलग-अलग शर्तों का हवाला देकर दावे खारिज कर रही हैं। इससे किसानों में भारी नाराजगी है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। केसीसी ऋण पर राहत दी जाए और बीमा कंपनियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। किसानों ने उम्मीद जताई कि मौसम साफ हो और सरकार उनकी परेशानी को समझते हुए जल्द राहत पैकेज घोषित करे ताकि उनकी आजीविका बच सके।
कोट
जिले में 26 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल लगाई गई है। किसानों को फसल बीमा बारे जागरूक किया जाता रहा है। अभी तक उन के पास नुकसान की कोई शिकायत नही आई है। मौसम के साफ होने पर ही नुकसान के आंकड़े जुटाए जा सकेंगे।
-राकेश खजूरिया, जिला मुख्य कृषि अधिकारी सांबा