सांबा। जिले के राया मोड़ नेशनल हाईवे से विश्वविद्यालय परिसर के बीच चलने वाली शटल बस सेवा को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बसों का लैंगिक आधार पर विभाजन किए जाने से न केवल अव्यवस्था फैल रही है, बल्कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर मुख्य मार्ग से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है और क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा चलाई जा रही शटल सेवा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में लगभग 7- 8 बसें संचालित की जा रही हैं, जिन्हें कथित रूप से लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग निर्धारित कर दिया गया है।
छात्र राहुल, रिशू, दिशांत ने कहा कि सीमित बसों के कारण उन्हें हाईवे पर तब तक रोका जाता है जब तक बस पूरी तरह भर न जाए, जिससे वह सुबह 9:30 बजे की कक्षाओं में देर से पहुंचते हैं।
छात्रा नितिशा, नीरज, ज्योति देवी, वंदना ने कहा कि कुछ बसें निर्धारित समय से पहले ही रवाना हो जाती हैं। जो छात्राएं सुबह 9:00 बजे पहुंचती हैं, उन्हें परिवहन सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती, जबकि अन्य बसें आधी खाली अवस्था में केवल लड़कों के लिए रवाना होती दिखाई देती हैं।
छात्रों का कहना है कि जब वे जम्मू-कश्मीर परिवहन निगम की बसों में साथ यात्रा करते हैं और कक्षाओं में भी साथ बैठते हैं, तो केवल 20 मिनट की शटल यात्रा के लिए अलगाव की नीति तर्कसंगत नहीं है। छात्रों ने इस नीति को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि यह आधुनिक शैक्षणिक माहौल के अनुरूप नहीं है और इससे परिसर में असमानता की भावना को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बस सेवा को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर संचालित किया जाए, ताकि सभी विद्यार्थी समय पर अपनी कक्षाओं में पहुंच सकें। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल पुनर्विचार करने और छात्र हित में व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।