संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। प्रेम संबंध के चलते सेना में कार्यरत एक युवक की आत्महत्या के मामले में प्रधान सत्र न्यायालय ने आरोपी युवती की मां और उसके एक रिश्तेदार को अग्रिम जमानत प्रदान की है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों और गवाहों के बयानों से आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होता।
मामला उस जमानत याचिका से जुड़ा था, जिसे कथित प्रेमिका, उसकी मां और एक अन्य रिश्तेदार की ओर से अदालत में दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने युवती की मां और दूसरे आरोपी को राहत देते हुए कहा कि केवल प्रेम संबंध होना, विवाह प्रस्ताव का अस्वीकार किया जाना या पैसों के लेन-देन को लेकर आशंका व्यक्त करना आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतक युवक का पिछले करीब चार वर्षों से युवती के साथ प्रेम संबंध था और दोनों परिवारों को भी इसकी जानकारी थी। आरोप है कि विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने और मानसिक तनाव के कारण युवक ने 2 दिसंबर 2024 को जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मृतक के पिता ने बयान में आरोप लगाया कि युवती और उसकी मां ने रिश्ते से इंकार करते हुए उनके बेटे को मानसिक रूप से अस्थिर बताया था। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि युवक द्वारा लिया गया बैंक ऋण का कुछ पैसा युवती ने इस्तेमाल किया होगा।
हालांकि अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश गवाहों के बयान धारा 108 बीएनएस के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते। अदालत ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी जाए। साथ ही जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने और निवास स्थान में बदलाव न करने जैसी शर्तें भी लगाई गई हैं।