सांबा। किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सांबा में कृषि फसलों और औषधीय पौधों की जैविक खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किसानों से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ खेती पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया गया।
यह कार्यक्रम हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला की तरफ से क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण के वित्तपोषण से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संस्थान की निदेशक मनीषा थपलियाल ने संस्थान की तरफ से किए जा रहे अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जानकारी दी। जल स्रोतों के संरक्षण और कृषि विविधीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों, औषधीय पौधों के उत्पादन, प्राकृतिक खेती, वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग तथा जैव उर्वरकों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही बागवानी फसलों में कद्दू उगाने की तकनीक तथा ड्रोन के माध्यम से जैव उर्वरक के प्रयोग का प्रदर्शन भी किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सांबा जिले के लगभग 50 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर कृषि विभाग के जोगिंदर सिंह चौहान, संदीप शर्मा, संजय खजूरिया, अश्वनी तपवाल और शालिनी खजूरिया सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित थे।