पिछले दो सप्ताह में छह अलग-अलग जगह पर मवेशी चोरी के मामले सामने आए
राजीव सिंह लंगेह
अरनिया। गर्मियों में मवेशी चोरी के मामले बढ़ने से ग्रामीण परेशान हैं। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। पिछले दो सप्ताह में क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर छह जगह पर मवेशी चोरी की वारदातें सामने आई हैं। हैरत इस बात की है कि किसी भी मामले में पुलिस को सफलता नहीं मिली है।
पीड़ितों में गांव महाशय दे कोठें के नत्थाराम और राजकुमार के दो मवेशी, अरनिया के जॉनी कुमार के दो मवेशी, गांव पोआल के योगराज सैनी के दो मवेशी, अदलैहड़ के बिट्टू कुमार का एक मवेशी और कूल कलां के अमरजीत सिंह के दो मवेशी और गंडली कोठें के वीर सिंह के दो मवेशी चोरी हुए हैं। ग्रामीणों की मवेशी चोरी की शिकायत सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सीमावर्ती क्षेत्र के मुख्य नाकों में रठाना, शिबू चक, कठार, सलैहड़ और देओली पर पुलिस तैनाती कमजोर है और अक्सर नाके खाली रहते हैं। इससे मवेशी तस्करों के लिए सीमावर्ती इलाकों को सेफ रूट बनने का मौका मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति पिछले चार साल से बनी हुई है। इस अवधि में कोई भी मवेशी चोरी की रिकवरी रिपोर्ट नहीं हुई है। पुलिस-पब्लिक मीटिंगों में ग्रामीणों ने नाकों में बढ़ोतरी और मवेशी तस्करी पर कड़ी कार्रवाई की मांग जोर शोर से उठाई। लोगों का आरोप है कि अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दिए। जानकारों का मानना है कि यदि नाकों की नियमित निगरानी, पेट्रोलिंग और सीमावर्ती क्षेत्रों पर सघन चेकिंग नहीं की गई तो तस्करी और बढ़ सकती है।
मवेशी चोरी ने ग्रामीणों की जीवनयापन पर असर डाला है। पुलिस मवेशी तस्करों के खिलाफ गंभीर नजर नहीं आ रही। पिछले चार साल में एक भी रिकवरी नहीं हुई है। नाकों की नियमितता और सक्रियता में कमी ने तस्करी को बढ़ावा दिया है।
- सुनील दत शास्त्री
अरनिया मवेशी तस्करी का पुराना गढ़ माना जाता है। साल दर साल मवेशी चोरी के मामले सामने आते हैं। ग्रामीणों की शिकायत दर्ज होती है और मामला लटक जाता है। पुलिस की तरफ से कोई भी अभियान मवेशी तस्करी के खिलाफ नहीं चलाया गया है। इसके चलते मवेशी तस्करों के हौसले बुलंद हैं और हर साल दर्जनों मामले मवेशी तस्करी के सामने आते हैं।
- सोनू पंडित, समाज सेवक
कोट
मवेशी तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स भी क्षेत्र में तैनात की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशी तस्करी में ज्यादातर छोटे तस्कर संलिप्त हैं जिन्हें पकड़ पाना कई बार ज्यादा मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी स्रोत की कमी पुलिस के लिए चुनौती बड़ी चुनौती साबित होते हैं।
- अन्ना लता सिन्हा, एसपी हेडक्वार्टर