किसान सुपिंदर सिंह खेत में बिछी धान की फसल दिखाता हुआ।
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अरनिया। क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल नुकसान का मुआवजा न मिलने पर कृषि विभाग और बीमा कंपनी पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि आंधी और बारिश से बर्बाद हुई धान की फसल का मुआवजा देने के नाम पर दोनों पक्ष टालमटोल कर रहे हैं, जबकि तय समय पर सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई थीं।
किसानों ने बताया कि धान के नुकसान के तुरंत बाद 14447 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद कृषि विभाग और बीमा कंपनी के अधिकारियों ने सर्वे कर नुकसान का आकलन किया था। इसके बावजूद मुआवजा जारी नहीं हो रहा।
नाराज किसान जम्मू स्थित बीमा कंपनी के हेड ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कंपनी जलभराव-बारिश को नुकसान का आधार मानकर भुगतान से इनकार कर रही है। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी योजना में हिस्सा नहीं लेंगे, क्योंकि हर साल बैंक खाते से प्रीमियम कटौती तो हो जाती है, लेकिन मुआवजा नहीं मिलता।
किसान जय सिंह ने बताया कि हेड ऑफिस में बात करने पर बीमा कंपनी ने उनकी फाइल रिजेक्ट होने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आपके क्षेत्र में ज्यादा नुकसान नहीं है। इसके चलते बीमा कवर नहीं दिया गया है जबकि इस बार धान की फसल का लगभग 50 फीसदी नुकसान हुआ है।
किसान सुपिंदर सिंह ने बताया कि 14447 पर कॉल करने के बाद मुआवजे की मंजूरी बताई जा रही है परंतु बीमा कंपनी फाइल रिजेक्ट होने की बात कर रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कृषि विभाग और बीमा कंपनी मिलकर किसानों को बेवकूफ बना रही है। कृषि विभाग के बड़े अधिकारियों को मुद्दे पर संज्ञान लेना चाहिए।
कृषि विभाग का पक्ष अलग है। विभाग ने दावा किया कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर बीमा कंपनी को मुआवजा राशि सौंप दी गई है और अब यह कंपनी की जिम्मेदारी है।
मुख्य कृषि अधिकारी जम्मू मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि ज्यादातर किसानों को मुआवजा मिल चुका है। जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। इस संबंधी बीमा कंपनी को अवगत करवाया जाएगा।