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Jammu News: तीन माह से आंधी से क्षतिग्रस्त पॉली हाउस की मरम्मत नहीं कर रहा ठेकेदार

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अरनिया के गांव चक भगवाना में क्षतिग्रस्त पाॅली हाउस। - फोटो : arnia news
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अरनिया। किसानों को खेतीबाड़ी में समृद्ध बनाने के लिए सरकार की तरफ से पाॅली हाउस योजना शुरू की गई है। पाॅली हाउस में ज्यादातर सब्जियां उगाई जाती हैं। लगभग 3 महीने पहले आंधी से क्षेत्र के दर्जन से अधिक पाॅली हाउस क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसमें पल्ली, ब्यासपुर, बडियाल, चक भगवाना, रतनाल, अरनिया गांव शामिल हैं। किसानों ने कहा, क्षतिग्रस्त पाॅली हाउस का मरम्मत कार्य कृषि विभाग और ठेकेदार की तरफ से नहीं किया जा रहा है। किसान कृषि विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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दूसरी ओर ठेकेदार किसानों का फोन तक नहीं उठा रहा है। किसानों ने बताया कि उनकी तरफ से पैसों का भुगतान भी कर दिया गया है। हालांकि कुछ किसानों की सब्सिडी भी विभाग द्वारा जारी कर दी गई है, परंतु चार महीने पहले तैयार किए गए पाॅली हाउस के क्षतिग्रस्त होने पर ठेकेदार मरम्मत कार्य नहीं कर रहा है। इससे क्षतिग्रस्त पाॅली हाउस का किसानों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है।
गांव चक भगवाना के किसान बाबूराम ने बताया कि उन्होंने पाॅली हाउस के दो ढांचे तैयार करवाए थे। इसका उन्होंने 20000 रुपए भुगतान किया था। क्षतिग्रस्त होने पर ठेकेदार फोन नहीं उठा रहा है। वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग जिम्मेवारी नहीं ले रहा है।
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गांव रतनाल के किसान कमल सिंह ने बताया कि तीन ढांचे पाॅली हाउस की योजना के तहत लिए हैं। तीनों ढांचे तूफान की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ठेकेदार टालमटोल कर रहा है। उन्होंने बताया कि पाॅली हाउस खेतीबाड़ी शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गए हैं। किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। कृषि विभाग को ठेकेदार पर नकेल कसनी चाहिए।

गांव पल्ली के किसान तरसेम लाल ने बताया कि 2 लाख 15 हजार की लागत से पाॅली हाउस का निर्माण कार्य ठेकेदार से करवाया था। इसकी सब्सिडी कृषि विभाग की तरफ से 1 लाख 90 हजार रुपए जारी कर दी गई है, परंतु ठेकेदार क्षतिग्रस्त पॉली हाउस को ठीक नहीं कर रहा है। सिर्फ टाल मटोल करके समय निकाल रहा है। लिहाजा कृषि विभाग ठेकेदार को पाॅली हाउस दुरुस्त करने के लिए कहे।

इस मुद्दे पर गांव आल्हा के किसान लवली सिंह ने कहा कि कृषि विभाग योजनाओं के लिए किसानों को प्रेरित करता है। योजना का लाभ भी उन्हें दिलाता है, परंतु समस्या आने पर अपना पल्ला झाड़ लेता है। यह सरासर गलत है। कृषि विभाग को ठेकेदार पर शिकंजा कसना चाहिए।

कोट
पाॅली हाउस में किसान और ठेकेदार की आपसी जवाबदेही है। इसमें कृषि विभाग का कोई लेना-देना नहीं है। कृषि विभाग योजना देने के बाद सब्सिडी जारी करता है। उसके अलावा कृषि विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
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-अरुण जाराल, सब डिविजनल एग्रीकल्चर अफसर आरएस पुरा
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