अरनिया। आरएस पुरा सब डिवीजन में सिंचाई की आधुनिक तकनीक से 10 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर सिंचाई की जा रही है। इससे बड़े पैमाने पर पानी की बचत और फसल की पैदावार बढ़ी है। रेन गन, स्प्रिंकलर और ड्रिप की आधुनिक तकनीक से सिंचाई की जा रही है। रेन गन से गेहूं, धान और अन्य फसलों को पानी दिया जा रहा है। इससे एक समय पर 30 मीटर के दायरे में फसल की सिंचाई होती है। स्प्रिंकलर से सब्जियों की सिंचाई मुख्य रूप से होती है। इससे खेत में एक समय पर तीन से पांच मीटर के दायरे में पानी का छिड़काव होता है।
ड्रिप तकनीक से सब्जी और फलों की फसलों की सिंचाई विशेष तौर पर की जाती है। सिंचाई की आधुनिक तकनीक से 50 फीसदी पानी की बचत होती है। साथ ही फसल के पत्तों से लेकर जड़ों तक पानी पहुंचता है। इससे फसल की पैदावार बेहतर और उम्दा होती है। इस तकनीक से खेतों में एक जगह पर पानी एकत्रित नहीं होता है। यह सूखे के दिनों में काफी लाभकारी सिद्ध होती है।
सरकार दे रही सब्सिडी
सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के तहत सरकार की तरफ से रेन गन, स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के लिए सब्सिडी मुहैया की जा रही है। रेन गन से एक हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के लिए 50000 रुपए का, स्प्रिंकलर से एक हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए 1 लाख रुपए और ड्रिप तकनीक से 1 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए डेढ़ लाख रुपए का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होता है। सभी पर 55 फीसदी सब्सिडी मुहैया की जा रही है। योजना का दायरा किसान अपनी जरूरत के हिसाब से बढ़ा सकते हैं।
आरएस पुरा में योजना से जुड़ चुके 15 किसान
आरएस पुरा सबडिवीजन में सिंचाई की आधुनिक तकनीक को सितंबर और अक्तूबर में लांच किया गया है। कृषि विभाग द्वारा अभी तक 15 लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया है। कृषि विभाग आधुनिक सिंचाई योजना के साथ मोटर पंप और बोरवेल पर भी सब्सिडी दे रहा है।
सिंचाई की आधुनिक तकनीक से किसान खाद और पेस्टिसाइड का छिड़काव भी कर सकता है। इससे किसानों के मजदूरी के खर्चे की बचत होगी। आधुनिक तकनीक से दवाइयों के छिड़काव से फसल की बंपर पैदावार होगी।
कोट
सिंचाई की आधुनिक तकनीक से किसानों को फायदा हो रहा है। पानी बचत के साथ फसल की पैदावार में इजाफा हुआ है। कृषि विभाग की तरफ से किसानों को समृद्ध बनाने के लिए योजनाओं के साथ सब्सिडी की सुविधा भी दी जा रही है।
-सुरेंद्र गुप्ता, सब डिविजनल एग्रीकल्चर अफसर आरएस पुरा