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Jammu News: जीएमसी राजोेरी के पैरामेडिकल छात्रों ने किया प्रदर्शन, नारेबाजी

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प्रदर्शन करते विद्यार्थी। - फोटो : rajori news
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राजोेरी। सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) राजोेरी के पैरामेडिकल छात्रों के एक बड़े समूह ने शनिवार को एक बार फिर से जम्मू विश्वविद्यालय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
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इसमें उनके हालिया परीक्षा परिणामों के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। पीड़ित छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और राजोेरी-धनौर मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, नारे लगाए और न्याय की मांग की।
छात्र सुबह के समय कॉलेज परिसर के बाहर एकत्र हुए और मुख्य सड़क को अवरुद्ध कर दिया। इससे कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में घोषित परिणामों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया, जिसमें छात्रों के अनुसार, 44 छात्रों में से 40 को फेल घोषित किया गया था, जिसमें से अधिकांश केवल दो विषयों- फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में फेल हुए थे।
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प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने कहा कि यह कैसे संभव है कि 90 फीसदी छात्र केवल दो विशिष्ट विषयों में अनुत्तीर्ण हों। यह स्पष्ट रूप से मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है। छात्रों ने आगे आरोप लगाया कि जम्मू विश्वविद्यालय अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और जांच की अनुमति देता है, लेकिन पैरामेडिकल छात्रों को यही सुविधा नहीं दी जाती। इसके बजाय, विश्वविद्यालय ने पूरक परीक्षा की घोषणा की, जिसमें छात्रों से 3000 रुपये का शुल्क मांगा गया, जिसे छात्रों ने अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण करार दिया।
बढ़ते तनाव के बीच, पुलिस अधिकारी विरोध स्थल पर पहुंचे और छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। आश्वासन के बाद छात्रों ने अस्थायी रूप से विरोध वापस ले लिया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि पूरक परीक्षाओं से पहले पुनर्मूल्यांकन का अवसर नहीं दिया गया, तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे। इस बीच, जीएमसी राजोेरी के प्रिंसिपल डॉ. एएस भाटिया ने इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पाठ्यक्रम संचालन और परीक्षा प्रबंधन में खामियों की ओर इशारा करते हुए पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
प्रिंसिपल ने कहा कि यह कैसे उचित ठहराया जा सकता है कि 3 साल के कोर्स को पूरा होने में 6 साल लग रहे हैं। परिणाम 7 महीने की देरी से घोषित किए जाते हैं और प्रश्न पत्र निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं होते हैं। प्रिंसिपल ने विद्यार्थियों को आश्वासन दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को जम्मू विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के समक्ष उठाएंगे।
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