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Jammu News: गांव कमाला में सड़क सुविधा नहीं, दरिया पार करने के लिए नाव का सहारा

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ज्यौड़ियां। छंब विधानसभा क्षेत्र की पंचायत बटल के वार्ड नंबर दो का गांव कमाला एलओसी पर भारत का आखिरी गांव है। यहां के लोगों ने भी आपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से दागे गये गोलों का सामना किया था। गांव के लोगों के अनुसार गांव में न ही कोई बंकर और न ही कोई ऐसी जगह है, जहां लोग सुरक्षा के लिए पनाह ले सकें। सड़क सुविधा भी नहीं है। पानी भी दूर से ढोना पड़ता है। बीमार होने पर खौड़ जाना पड़ता है। किश्ती के सहारे मनावर तवी नदी को पार करना पड़ता है।
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गांव निवासी मेलो देवी, थोडू राम, जग्गू राम, रसाल सिंह आदि ने बताया कि पहलगाम हमले के दौरान भारत पाकिस्तान के बीच बने तनाव के चलते गांव में पाकिस्तान की तरफ से दागे गए गोले भी गिरे थे, लेकिन हम लोग गांव से बाहर निकल कर सुरक्षित स्थान पर भी नहीं जा सकते थे। बड़ी मुश्किल से जान बचाई। गांव में न ही कोई बंकर और न ही सड़क। गांव से बाहर निकलने के लिए मनावर तवी को भी पार करना पड़ता है। गांव की महिला विमला देवी ने बताया कि हमारे जीवन की एक ही ख्वाहिश थी कि गांव में भी गाड़ी आए लेकिन ऐसा लग रहा है कि हम वह नहीं देख पायेंगे।
मेलो देवी ने बताया कि हमने पूरी जिंदगी मुश्किलों में गुजार दी। जब कभी भी हम लोग बीमार पड़ते हैं तो इलाज के लिए बहुत मुश्किल आती है। इलाज के लिए 40 से 50 किलोमीटर दूर खौड़ जान पड़ता है। बीमार पड़ने पर मरीज को छह किलोमीटर चारपाई पर ले जाया जाता है। गांव में न ही साफ पानी का कोई स्रोत है। लोगों को एक किलोमीटर पैदल सफर तय कर बावली से पानी लाना पड़ता है। यहां के बच्चों को पांचवीं के बाद शिक्षा हासिल करने के लिये छह किलोमीटर पैदल सफर तय कर जाना पड़ता है। मनावर तवी में बाढ़ आने पर बच्चों को स्कूल से छुट्टी करनी पड़ती है।
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लोगों ने बताया कि स्थानीय विधायक व मंत्री सतीश कुमार शर्मा ने चुनाव के समय आश्वासन दिया था कि मनावर तवी पर पुल और गांव तक सड़क का निर्माण कर गांव में गाड़ी को पहुंचाया जाएगा, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह अभी तक गांव में आए ही नहीं।
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