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Jammu News: सुमाह में सजा दंगल, ईरान के अहमद मिर्जा बने सुमाह केसरी

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दंगल में भिड़ते पहलवान।  - फोटो : akhnoor news
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अखनूर। अखनूर क्षेत्र के सुमाह में चैत्र चतुर्थी मेले के अवसर पर दंगल का आयोजन किया गया। मेले के दूसरे दिन हुए इस दंगल में देश-विदेश के नामी पहलवानों ने भाग लिया। दंगल का सबसे बड़ा मुकाबला 2.51 लाख रुपये की इनामी कुश्ती के रूप में ईरान के अहमद मिर्जा और हरियाणा के बिना मांडोठी के बीच हुआ। इसमें अहमद मिर्जा ने जीत दर्ज कर ‘सुमाह केसरी’ का खिताब अपने नाम किया।
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वहीं दूसरी बड़ी 2 लाख रुपये की कुश्ती में रूस के इब्राहिम और पंजाब के डेरा बाबा निवासी मेजर के बीच मुकाबला हुआ। इसमें मेजर विजेता रहे। तीसरी प्रमुख कुश्ती में हिमाचल के रजत ने ईरान के हौदी को हराया। इसके अलावा यूपी के कलवा गुर्जर ने पंजाब के मोहित को पराजित कर मुकाबला अपने नाम किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विधायक मोहन लाल भगत ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अखनूर विधानसभा क्षेत्र में कुश्ती एक बेहद लोकप्रिय खेल है और इसे और बढ़ावा देने के लिए यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त अखाड़ा स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से क्षेत्र के युवाओं को बेहतर मंच मिलेगा और उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आएगी। उन्होंने आगे कहा कि यदि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिलें तो वे न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोशन कर सकते हैं। विधायक ने यह भी दोहराया कि सरकार खेलों के विकास और खिलाड़ियों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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इस अवसर पर युवा राजपूत सभा के पूर्व प्रधान राजन सिंह हैप्पी, विक्रम सिंह, पूर्व सरपंच अश्वनी शर्मा, पूर्व पार्षद राकेश मल्होत्रा, सुमन सिंह, मदन लाल, भाजपा मंडल अध्यक्ष सोहल-सुंगल शमशेर दास, मंडल अध्यक्ष ज्यौड़ियां नीरज शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

दंगल का आयोजन सुमाह देवता दंगल कमेटी द्वारा किया गया। कमेटी के प्रधान हरीश शर्मा, संजय शर्मा, तिलक राज, विनोद, राकेश, केवल, शुभम, अभय, रिंकू, योगराज, रवि, बिट्टू, पूर्व सरपंच रामपाल, गणेश शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय योगदान दिया।

दंगल में हजारों दर्शकों की भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा आयोजन उत्सव में तब्दील हो गया। यह दंगल न केवल एक खेल प्रतियोगिता रहा, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और खेल भावना का जीवंत प्रतीक भी बना।
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