जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) की कवायद तेज हो गई है। जिले के बुद्धि गांव के नजदीक 733 कनाल जमीन को औद्योगिक विभाग को सौंपने की तैयारी है। इसका अगले सप्ताह कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की टीम जायजा लेने आ रही है।
एमएमएलपी को ड्राई पोर्ट भी कहा जाता है। ड्राई पोर्ट बंदरगाह तर्ज की परियोजना है, जहां हर क्षेत्र के सामान के भंडारण से लेकर कंटेनर के जरिए आपूर्ति कराई जाती है। जम्मू-कश्मीर के लिए यह परियोजना आर्थिक सुधार, रोजगार सृजन और विकास को रफ्तार देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ड्राई पोर्ट से जम्मू-कश्मीर की देश के बाकी हिस्सों से कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार होगा। देश-विदेश की कंपनियां प्रदेश में कारोबार करने के लिए आएंगी। इस क्षेत्र में पार्क से लोगों के साथ ही सामान की आवाजाही भी और आसान हो जाएगी। दिल्ली कटड़ा एक्सप्रेस-वे, नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक से निकटता के चलते बुद्धि क्षेत्र को एमएमएलपी के लिए माकूल बताया जा रहा है।
लागत समेत कई तरह के खर्च हो जाते हैं कम
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एमएमएलपी न सिर्फ लॉजिस्टिक लागत को कम करता है, बल्कि वेयर हाउस खर्च, वाहनों से प्रदूषण और जाम की स्थिति से निपटने में भी सहायक होता है। एमएमएलपी में गोदाम, रेलवे साइडिंग, रेफ्रीजरेशन हाउस, कस्टम क्लीयरेंस हाउस, यार्ड सुविधा, वर्कशॉप, पेट्रोल पंप, ट्रक पार्किंग, प्रशासनिक भवन, रहने एवं खाने-पीने की सुविधाएं आदि की सुविधाएं प्रस्तावित हैं।
देशभर में बन रहे यह पार्क
रसद दक्षता संवर्धन कार्यक्रम (एलईईपी) के तहत देश के कई हिस्सों में ऐसे लॉजिस्टिक पार्क बनाए जा रहे हैं। हाल के महीने में जहां असम में देश के पहले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क का काम शुरू किया गया है। वहीं गुजरात में देश के सबसे बड़े मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के लिए उद्योग और खनन विभाग ने 23 जनवरी 2021 को अडानी पोर्ट्स एंड सेज लिमिटेड के साथ साणंद में ऑटो-मोबाइल हब के नजदीक विरोचननगर में 1450 एकड़ भूमि में लगभग 50,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एमओयू साइन किया है।
पंजाब, सूरत, मुंबई, इंदौर, पटना, हैदराबाद, विजयवाड़ा, कोयंबटूर, बंगलूरू, संगरूर, चेन्नई बंदरगाह के पास, पुणे, अहमदाबाद, राजकोट, कांडला, वडोदरा, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, बठिंडा, हिसार, अंबाला, कोटा, जयपुर, जगतसिंहपुर, सुंदरनगर, दिल्ली, कोलकाता, पुणे, नासिक, पणजी, भोपाल, रायपुर और जम्मू संभाग में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क प्रस्तावित हैं।
जम्मू-कश्मीर सरकार का दुबई पोर्ट्स वर्ल्ड के साथ हुआ था करार
जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार और दुबई पोर्ट्स वर्ल्ड के बीच वर्ष 2018 में ड्राई पोर्ट को लेकर करार किया गया था, लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने के बाद प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए स्वदेशी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। हाल ही में प्रदेश में 45 से अधिक कंपनियां निवेश के लिए आगे भी आने को राजी हो गई हैं।
प्रस्तावित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (ड्राई पोर्ट), प्रसंस्करण केंद्रों और बाहर के बाजारों में स्थानीय उपज के तेजी से आवागमन की सुविधा प्रदान करेंगे। इससे किसानों, उद्योगपतियों, व्यापारियों और व्यवसायियों की आय बढ़ेगी। बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। ड्राई पोर्ट बनने से जांच के बाद कंटेनर इन पोर्ट्स में ही सील किए जाएंगे। फिर उन्हें रेल, सड़क या वायुमार्ग से निर्यात के लिए सीधे भेजा जा सकेगा।
प्रदेश से कृषि, ड्राई फ्रूट, फलों और अन्य उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। प्रदेश से सामान भेजने के बाद बंदरगाह पर जांच के बाद कंटेनर सील किए जाते हैं। इसमें समय तो लगता ही है, सामान के खराब होने की आशंका भी रहती है। कस्टम और निर्यात संबंधी कागजात भी इन्हीं ड्राई पोर्ट पर तैयार किए जा सकेंगे।