जम्मू। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य सेहत योजना के तहत पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं न मिलने से मरीज परेशान हैं। सरकारी अस्पतालों में गाल ब्लैडर, अपैंडिक्स, बवासीर, फिशर सर्जरी के साथ डायलिसिस के लिए मरीजों का लोड अचानक बढ़ गया है। सरकारी अस्पतालों में पहले ही अपैंडिक्स को छोड़कर अन्य लगभग सामान्य सर्जरी के लिए महीनों की तिथि दी जा रही है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय ने हस्तक्षेप किया है। इस हफ्ते मुख्यमंत्री निजी चिकित्सा संस्थान प्रबंधनों से बात कर सकते हैं।
सेहत योजना के तहत निजी अस्पतालों का गत 15 मार्च को निविदा समझौता संपन्न हो गया है। हालांकि सरकार की ओर से उन्हें एक माह सेवाएं जारी रखने को कहा गया था। मगर 250 करोड़ रुपये की देनदारी होने से निजी संस्थानों ने सेवाएं देना बंद कर दिया। हालांकि कुछ ट्रस्टी और सीमित निजी अस्पतालों ने सेवाएं जारी रखीं हैं। मगर व्यापक स्तर पर निजी अस्पतालों के सेवाएं न देने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
इंसेंटिव बंद होने, सर्जरी को पैकेज से बाहर करने से नाराज
निजी संस्थान प्रबंधन नए पीएस 8 पैकेज में निजी संस्थानों को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन को खत्म करने, गाल ब्लैडर, अपैंडिक्स, बवासीर और फिशर सर्जरी को पैकेज से बाहर करके सरकारी अस्पतालों में करने और डायलिसिस का निजी अस्पतालों में शुल्क कम करने से नाराज हैं।
निजी अस्पताल व डायलिसिस सेंटर एसोसिएशन के प्रधान संदीप मैंगी का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बातचीत के लिए कहा गया है और उम्मीद है कि जल्द मुख्यमंत्री से बात होगी। उन्होंने कहा कि रोगी चिकित्सा देखभाल को देखते हुए सरकार को निजी चिकित्सा संस्थानों में नए मानकों पर पुनर्विचार करना चाहिए। इसके अलावा लंबित देनदारी को शीघ्र जारी किया जाएगा। बताया जाता है कि हर साल 15 मार्च तक सरकार को निजी संस्थानों के साथ निविदा प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है, लेकिन इस बार अभी तक नहीं हो पाई है। जीएमसी के नेफरोलाजी विभाग के एक डाक्टर ने बताया कि कुछ निजी संस्थान अभी डायलिसिस सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन विभाग में डायलिसिस के लिए मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। अगर निजी संस्थान सेवाएं देना बंद कर देंगे तो सरकारी स्तर पर डायलिसिस के लिए अचानक लोड बढ़ जाएगा। इसमें सभी को एक साथ डायलिसिस सेवा देने में मुश्किल होती है।