जम्मू। जम्मू-कश्मीर में इंद्रदेव की बेरुखी खत्म नहीं हो रही। जनवरी की तरह फरवरी में भी बारिश न के बराबर हुई है। यहीं हाल नवंबर और दिसंबर में भी था। कुल मिलाकर पिछले चार महीनों से किसान आसमान पर टकटकी लगाए बैठे हैं। बारिश न होने का सबसे बड़ा असर गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। खासकर कंडी बेल्ट में। यहां 75 फीसदी क्षेत्र बारिश के पानी पर निर्भर करता है, क्योंकि इस समय नहरों में पानी भी नहीं है, इसलिए बारिश की कमी ज्यादा खल रही है।
जानकारी के अनुसार जनवरी में जम्मू संभाग में औसत 21.56 एमएम बारिश हुई है, जबकि 109.3 एमएम बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से सामान्य से करीब 80 फीसदी बारिश कम हुई है। इसी तरह कश्मीर संभाग में 22.91 एमएम बारिश हुई जोकि 99.07 एमएम होनी चाहिए थी। ये भी सामान्य से 76.87 एमएम कम है। नवंबर 2024 में जम्मू कश्मीर में 10.09 एमएम बारिश हुई जोकि 35.3 होनी थी। ये सामान्य से 69 फीसदी कम है। दिसंबर 2024 में 25.1 एमएम बारिश हुई जोकि 59.4 एमएम होनी चाहिए थी। यहां भी सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश हुई है।
मैदानों में सबसे ज्यादा स्थिति खराब
एक जनवरी 2024 से 6 फरवरी तक जम्मू संभाग के कठुआ, जम्मू, सांबा और उधमपुर में सबसे कम बारिश हुई है। जम्मू में मात्र 5.2, कठुआ में 3.6, सांबा में 5.5 और उधमपुर में 8.2 एमएम बारिश हुई। इन चारों जिलों में सामान्य से 90 फीसदी कम बारिश हुई है। इन्हीं चारों जिलों में ही सबसे अधिक गेहूं की फसल लगी हुई है। बारिश न होने से फसल पर गहरा असर पड़ रहा है।
फसल पड़ सकती है पीली : कृषि निदेशक
कृषि विभाग जम्मू संभाग के निदेशक एएस रीन के मुताबिक, कई महीनों से बारिश न होना सूखे की तरफ ले जा रहा है। इस समय गेहूं की फसल को बारिश की काफी जरूरत रहती है। यदि बारिश न हुई तो फसल पीली पड़ सकती है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि किसी तरह जुगाड़ लगाकर फसलों को पानी लगाएं। साथ ही कुछ दवाइयों का छिड़काव भी करें। इसके लिए कृषि विभाग से राय ली जा सकती है। संभव हो तो सरकार को नहरों में पानी जल्द छोड़ देना चाहिए, ताकि किसानों को पानी मिल सके।