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सुखद: बदली सोच, बढ़ा बेटियों का मान और लिंगानुपात 976 पहुंचा

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जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के आर्थिक सर्वेक्षण में सेहत के मोर्चे पर स्वस्थ तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य क्षेत्र का स्कोर 70 से बढ़कर 78 हो गया है। प्रदेश में जन्म के समय लिंगानुपात 923 से बढ़कर 976 तक पहुंच गया है। यह समाज की बदल रही सोच, बढ़ते बेटियों के मान का संकेत है। वहीं, प्रदेश में प्रति एक हजार जीवित जन्म लेने वाले नवजात की मृत्यु दर 9.8 हो गई है। इसमें 13.3 अंकों की कमी दर्ज की गई है, शिशु मृत्यु दर भी 16.3 पर आ गई है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संचारी और गैर-संचारी रोगों पर विशेष ध्यान दे रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए तकनीकी और चिकित्सा उपकरणों सहित सभी स्तरों पर बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। नीति आयोग के अनुसार जम्मू-कश्मीर प्रदर्शन करने वालों की श्रेणी से आगे बढ़कर अग्रणी की श्रेणी में आ गया है, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र का स्कोर 70 से बढ़कर 78 हो गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रोकथाम योग्य बीमारियों के खिलाफ पूरी तरह से टीकाकरण किए गए बच्चों का प्रतिशत बढ़कर 96.5 प्रतिशत हो गया है। संस्थागत जन्म 85.6 प्रतिशत से बढ़कर 92.40 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर में जन्म के समय जीवन प्रतिशत 74.3 वर्ष तक पहुंच गया है। सेहत योजना के तहत 86.12 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पहल ने 2800 करोड़ रुपये के उपचार की सुविधा प्रदान की है, जिससे 15 लाख व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।
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489 एम्बुलेंस को जियो-टैग किया गया है। ऑनलाइन 108/102 एम्बुलेंस सेवाओं के साथ एकीकृत किया गया है। रिपोर्ट में पिछले चार वर्षों में स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 10,919 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की गई। दो एम्स, दो राज्य कैंसर संस्थान और आर्थोपैडिक से जुड़े दो अस्पताल बनाए गए हैं। मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष औषधालयों को उन्नत करके 3100 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों का संचालन किया गया है। अस्पतालों में बिस्तर की क्षमता बढ़ाकर 21,966 कर दी गई है। ।
दस मेडिकल कॉलेज शुरू हुए
दस सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं, जिनमें से नौ एमबीबीएस, एक यूनानी, एक आयुर्वेदिक और एक होम्योपैथी पाठ्यक्रम दे रहे हैं। एमबीबीएस सीटों की क्षमता 500 से बढ़ाकर 1300 कर दी गई है। साथ ही कहा गया है कि 2019 से एमबीबीएस, डीएनबी, स्नातकोत्तर और नर्सिंग पाठ्यक्रमों में 5,000 से अधिक सीटें जोड़ी गई हैं।
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