जम्मू। दिव्यांग व वृद्धजनों की यात्रा को सुगम बनने वाले 20 हजार से ज्यादा पिट्ठू-पालकी व घोड़े-खच्चर वालों को रोजगार छीनने का डर सता रहा है। इसका कारण ताराकोट मार्ग से सांझीछत तक रोपवे परियोजना है। इस परियोजना के विरोध में ये लोग बीते दिनों से हड़ताल पर हैं।
इनका कहना है कि बाण गंगा से अर्द्धकुंवारी तक 1200 रुपये किराया लेते हैं, जिस पर 18 फीसदी जीएसटी श्राइन बोर्ड लेता है। मां के भवन से भैरव मंदिर तक रोपवे और बैटरी कार ने पहले ही रोजगार कम कर दिया है। अब तारकोट से सांझीछत तक रोपवे रोजगार छीन लेगा।
रियासी जिले माहोर निवासी शमसदीन कहते हैं कि 17 साल से यात्रा ट्रैक पर घोड़ा चला रहा हूं। मेरे दादा और पिता भी यहां घोड़ा चलाते थे। पिता के समय से लेकर अपने 17 साल के सफर यात्रा मार्ग में कई बदलाव देखे। नई व्यवस्था व सुविधाएं शुरू कीं लेकिन पहली बार रोजगार खोने का डर लग रहा है। श्राइन बोर्ड की ताराकोट से सांझीछत तक रोपवे परियोजना से हम बेरोजगार हो जाएंगे। श्रद्धालु घोड़े व पालकी में नहीं जाएंगे। बोर्ड अगर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस परियोजना को शुरू करना चाहता है तो पहले हमारे लिए रोजगार की व्यवस्था करे।
माहौर के इब्राहिम भी 12 साल से काम कर रहे हैं। परिवार का पालन पोषण इसी काम पर निर्भर है। तीन दिन से काम बंद है अगर कुछ दिन और ऐसा चला तो आर्थिक तंगी बढ़ जाएगी। श्राइन बोर्ड लोगों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। अभी दिन में एक ही फेरा मिलता है। दोनों तरफ का किराया 2400 रुपये हैं, जिसमें 36 फीसदी जीएसटी श्राइन बोर्ड लेता है। पहले तीस हजार लोग इस पेशे में थे, लेकिन बोर्ड ने कार्ड जारी करने व नवीनीकरण करने में सख्ती की जिससे दस हजार लोग कम हो गए। अगर रोपवे शुरू हुआ तो ये काम बंद हो जाएगा।
रियासी के गुलाबगढ़ के रहने वाले शरीफ दीन कहते हैं कि 1998 से काम कर रहा हूं। श्राइन बोर्ड जिस उद्देश्य से काम कर रहा है अगर वो पूरा हो गया तो पिट्ठू पालकी, घोड़ा खच्चर वालों के साथ-साथ कटड़ा शहर भी बेरोजगार हो जाएगा। ताराकोट से सांझीछत्त तक रोपवे परियोजना श्रद्धालुओं के लिए कितनी सुविधाजनक होगी, यह समय बताएगा, लेकिन हमारे जैसे लोगों के लिए यह बर्बादी लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि 2005 से 2017 में भी श्राइन बोर्ड की इस तरह की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
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श्रद्धालु बोले सुविधा बढ़े, लेकिन उसकी कीमत किसी का रोजगार न हो
जम्मू। रोपवे को लेकर जारी हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशान मां के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु हैं। कटड़ा शहर बंद होने से श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा समस्या भोजन और ठहरने की है। श्रद्धालु कहते हैं कि सुविधा बढ़नी चाहिए लेकिन उसकी कीमत किसी का रोजगार छीनना नहीं होना चाहिए। श्राइन बोर्ड यात्रा को आसान बनाए, सुविधाएं विकसित करे, लेकिन लोगों का रोजगार न छीने।
हर साल नए साल से पहले मां के दर्शन के लिए आती हूं। नए साल से एक सप्ताह पहले कटड़ा श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। श्रद्धालुओं का हुजूम रहता है। बाजारों में खरीदारी होती है, लेकिन इस बार की तस्वीर बड़ी अलग है। श्रद्धालुओं की संख्या न के बराबर है। जो श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं वो परेशान हैं। दुकानें बंद होने से खाने की सबसे ज्यादा समस्या है। यात्रा मार्ग पर सुविधा है, लेकिन बाजार में असुविधाओं का बोलबाला है।
-प्रमिला गुप्ता, श्रद्धालु नोएडा एनसीआर
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पिट्ठू पालकी वालों का काम काफी मेहनत वाला होता है। हमारी यात्रा के सफल होने में इनका बड़ा योगदान है। श्राइन बोर्ड अगर कोई सुविधा शुरू कर रहा है पहले उन लोगों के बारे में सोचे जो इसके शुरू होने से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने वाले हैं। कटड़ा बाजार को पहली बार इस तरह शांत देखा है। नए साल पर कटड़ा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां आना उतना आसान नहीं होगा जितना कि हुआ करता है।
-नीलम मित्तल, श्रद्धालु जयपुर
परिवार के साथ दर्शन करने आई थी लेकिन यहां आकर पता चला कि घोड़ा पालकी, पिट्ठू वालों की हड़ताल है। इसके कारण मां के दर्शन नहीं कर पाई। मां के इतने पास आकर दर्शन न करने का दुख है। रोपवे हमारे जैसे बुजर्गों के लिए वरदान होगा। मां के दर्शन करना हमारे लिए भी आसान होगा। वर्तमान व्यवस्था भी उतनी खर्चीली है और समय भी उतना ही लगता है। अगर रोपवे की सुविधा मिली तो समय की बचत होगी।
-यती द्रौपदी, श्रद्धालु मुंबई
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यात्रा को सुगम बनाने के लिए अगर कोई पहल की जा रही है तो होनी चाहिए। समय की बचत वर्तमान समय की जरूरत है। रोपवे बनने से मां के भवन तक पहुंचना बहुत आसान होगा। दो दिन पहले कटड़ा आए थे। यहां किसी तरह की सुविधा नहीं है। बस स्टैंड से बाण गंगा तक ऑटो नहीं मिल रहा है। श्रद्धालु परेशान हैं, श्राइन बोर्ड को इस तरफ ध्यान देना होगा क्योंकि नए साल में बड़ी संख्या में लोग मां के दर्शन के लिए आएंगे।
-अजीत यती, श्रद्धालु मुंबई