श्रीनगर। विधानसभा में राज्य के विशेष दर्जे से जुड़ा प्रस्ताव पारित होने के बाद भाजपा ने अपना रुख और कड़ा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष को घेरा है। नेता विपक्ष सुनील शर्मा ने कहा है कि अगर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर अपने व्यवहार को जारी रखते हैं तो वह जम्मू-कश्मीर में समानांतर सरकार चलाएंगे। उनका कहना था कि राथर का व्यवहार देश की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देता है।
विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सुनील शर्मा ने कहा, जब स्पीकर ने हमारे विधायकों को बाहर निकाला तो हमारे पास बाहर समानांतर विधानसभा थी। जिसमें हमने अपने क्षेत्रों के मुद्दे उठाए और मीडिया ने इसे कवर किया। अध्यक्ष को इस समानांतर विधानसभा को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, जिस तरह से स्पीकर ने विधानसभा का संचालन किया है वह निंदनीय है। विधानसभा का गठन लोगों ने इस उम्मीद के साथ किया था कि पानी, बिजली, अस्पताल और शिक्षा से जुड़ी उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। शर्मा ने कहा, स्पीकर ने एक खास पार्टी के एजेंट के तौर पर काम किया है और अलोकतांत्रिक तरीके से असांविधानिक और गैरकानूनी काम किया है। उन्होंने कहा कि सभी विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सदन में आए थे, लेकिन सत्तारूढ़ नेकां की अलगाववादी मानसिकता ने प्रस्ताव लाकर सदन की गरिमा को गिराया है।
स्पीकर नेकां प्रवक्ता की तरह काम कर रहे
सुनील शर्मा ने कहा, दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्पीकर कह रहे हैं कि विशेष दर्जे की मांग अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग है। वह नेकां के प्रवक्ता की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को देश के लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर ने हटाया था और इसका निपटारा सुप्रीम कोर्ट ने किया था। अनुच्छेद 370 अब इतिहास बन चुका है। वे अनुच्छेद 370 की तुलना विशेष दर्जे जैसे शब्द से कर रहे हैं, जो संविधान में है ही नहीं।
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सीएम को दी चुनौती
सुनील शर्मा ने कहा, मैं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को चुनौती देता हूं कि अगर संविधान में जम्मू-कश्मीर के संबंध में विशेष दर्जे का शब्द कहीं भी पाया जाता है, तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा। भाजपा नेता ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस विशेष दर्जे के नाम पर यहां सड़क पर हिंसा शुरू करना चाहती है। विशेष दर्जे के तहत कश्मीरी पंडितों को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया, आसिया नीलोफर की हत्या की गई, तुफैल मट्टू की हत्या की गई और हाजी यूसुफ को मुख्यमंत्री के घर में मार दिया गया। वे इस तरह का विशेष दर्जा वापस चाहते हैं।