जम्मू। अनुच्छेद 370 के मुद्दों को लेकर राजनीति चुनाव के बाद भी जारी है। नेकां ने जहां इस मुद्दे पर बाहरी जनादेश हासिल किया वहीं पीडीपी अब नेकां को न सिर्फ इस मुद्दे पर घेर रही बल्कि उससे इसे छीनने में लगी है। विधानसभा सत्र के पहले पीडीपी विधायक वहीद पर्रा द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के खिलाफ रखा प्रस्ताव इस बात का साफ संकेत है कि पीडीपी इन मुद्दों पर नेकां को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
विधानसभा चुनाव के दौरान नेकां ने अपने घोषणा पत्र में अनुच्छेद 370 की बहाली का वादा किया था। चुनाव प्रचार के दौरान भी नेकां ने इस मुद्दाें को गंभीरता से लोगों से बीच रखा जिसका परिणाम पार्टी को मिला। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के कारण लोग पीडीपी का भाजपा के साथ गठबंधन मानते थे और चुनाव नतीजों ने पर उस मोहर भी लगा दी थी। पीडीपी को चुनाव में सिर्फ तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में पीडीपी अब लोगों के खोए उस विश्वास को वापस लाने के लिए अनुच्छेद 370 की बहाली पर लोगों की आवाज बनने की कोशिश कर रही है। विस सत्र के पहले ही अनुच्छेद 370 पर प्रस्ताव उसका परिणाम है कि पीडीपी, नेकां से 370 का मुद्दा छीनने की कोशिश कर रही है ताकि घाटी में लोगों के बीच पीडीपी की खराब हुई छवि में सुधार किया जा सके।
राजनीतिक विशेषज्ञ प्रो. हरि ओम ने कहा कि विस सत्र के पहले दिन पीडीपी द्वारा अनुच्छेद 370 के खिलाफ प्रस्ताव लाना स्वभाविक था। पीडीपी कश्मीर संभाग में अपने उस जनाधार को वापिस लाने की कोशिश में है, जिसे नेकां ने उसने छीना था। पीडीपी सहित अन्य कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दल नेकां को अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर घेरने की हर संभव कोशिश करेंगे। इसमें नेकां के सामने दोहरी चुनौती है। नेकां को कश्मीर में अपने वोट बैंक को खुश रखने के साथ केंद्र के साथ समन्वय बनाना है। ऐसे में नेकां हर कदम को फूंक-फूंक कर रखने की कोशिश में है।