कुलगाम के जावेद अहमद तिली सिद्दड़ा में शहद के बक्सों की जांच करते हुए।
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जम्मू। मधुमक्खी पालन रोजगार के लिए अच्छा साधन है। कश्मीर समेत पूरे प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में मधुमक्खी पालक काम कर रहे हैं। मधुमक्खी पालन के लिए फूलों की जरूरत होती है जिसके चलते मधुमक्खी पालकों को अलग अलग मौसम में मधुमक्खी पालन के लिए देश के अन्य राज्यों में जाना पड़ता है। जिस राज्य में जाते हैं, उसी राज्य में शहद को बेचकर दूसरे राज्य की ओर बढ़ जाते हैं।
वली मोहम्मद पहलगाम कश्मीर के रहने वाले हैं और लगभग 12 साल से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। वह जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ राजस्थान में भी मधुमक्खी पालन करते हैं। वह 15 दिनों से जम्मू के सिद्दड़ा में मधुमक्खियों का पालन कर रहे हैं। वली मोहम्मद ने मधुमक्खी पालन के 320 डिब्बे लगाए हैं। एक डिब्बे की कीमत लगभग 800 से 1200 तक होती है। एक डिब्बे से चार से पांच किलो शहद निकलता है। लगभग एक महीने के बाद शहद तैयार होता है। 250 से 350 रुपया किलो तक की कीमत से शहद बिकता है।
कुलगाम कश्मीर के रहने वाले जावेद अहमद तिली 6 साल से देश के अलग अलग राज्यों में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। जावेद कहते हैं कि वह नवंबर में राजस्थान, मार्च में जम्मू और अप्रैल में कुलगाम में मधुमक्खी पालन करते है। मधुमक्खियां अलग अलग फूलों से रस चूस कर डिब्बों में शहद इकट्ठा करती हैं। लगभग एक महीने की मेहनत के बाद डिब्बों में से शहद निकालकर व्यापारी को बेचते हैं। डिब्बों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ट्रक से ले जाया जाता है।
सरकार भी मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए 1,40,000 रुपये के लोन में 35 डिब्बे देती है और जिसमें 80 प्रतिशत सब्सिडी है। मधुमक्खी पालक को केवल 20 प्रतिशत कर्ज चुकाना पड़ता है।