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Jammu News: बीसीआई के निर्देश के बाद 1500 से ज्यादा अधिवक्ताओं ने करवाया सत्यापन

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जम्मू। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में 1500 से ज्यादा अधिवक्ता अपना सत्यापन करवा चुके हैं। हाईकोर्ट की ओर से सत्यापन की आखिरी तारीख भी बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी गई है। देशभर में अधिवक्ताओं की फर्जी डिग्री के कई मामले सामने आने के बाद बीसीआई ने ये देशव्यापी कार्रवाई की है।
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पिछले साल दिसंबर महीने में बीसीआई ने सभी राज्यों की बार काउंसिल को अधिवक्ताओं का सत्यापन कराने का निर्देश दिया था। चूंकि प्रदेश में बार काउंसिल न होने की वजह से हाईकोर्ट के पास ही बार काउंसिल के सारे अधिकार हैं। इसलिए 12 दिसंबर को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से इस बारे में एक नोटिस जारी किया गया। नोटिस में सभी अधिवक्ताओं को सत्यापन फॉर्म जमा करने का निर्देश दिया गया। सत्यापन फॉर्म के साथ बार काउंसिल में नामांकन का प्रमाण पत्र और एलएलबी की डिग्री सहित अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश भी दिया गया। इसके अलावा अधिवक्ता बार एसोसिएशन का सदस्य है और लगातार वकालत कर रहा है या नहीं, इसका भी प्रमाण पत्र जमा करना था। नोटिस के आने के बाद से ही हाईकोर्ट के बाहर एक शिविर लगाया जा रहा है। जहां अब तक 1500 से ज्यादा अधिवक्ता अपना सत्यापन फॉर्म भर चुके हैं।

देशभर में मिल रहे फर्जी डिग्री वाले वकील, जम्मू में भी हो चुका है निष्कासन
देशभर में अधिवक्ताओं की फर्जी डिग्री के कई मामले सामने आने के बाद बीसीआई ने ये देशव्यापी कार्रवाई शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है, जिसकी देखरेख में डिग्रियों की जांच की जा रही है। संबंधित विश्वविद्यालयों से भी इन डिग्रियों की जांच करवाई जाएगी।
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बता दें कि दिसंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सांबा निवासी अधिवक्ता जोगिंदर सिंह सलाथिया की डिग्री फर्जी पाए जाने के बाद बार काउंसिल से निष्काषित कर दिया था। इससे पहले यूपी के एक प्रमुख विश्वविद्यालय के नाम से जारी 13 लॉ की डिग्री भी फर्जी पाई गई थीं। दिसंबर के महीने में ही दिल्ली बार काउंसिल के उपाध्यक्ष को भी कथित फर्जी डिग्री के मामले में निष्काषित कर दिया गया था।

कोट
बार एसोसिएशन के कार्यालय में लगातार अधिवक्ता खुद को प्रमाणित करवाने के लिए आ रहे हैं। जो अधिवक्ता एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं या जिनकी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है, उनके पास अंडरटेकिंग फॉर्म भरने का भी विकल्प है। वकीलों की डिग्री असली है या फर्जी, इसकी जांच तो होनी ही चाहिए। जिसकी खुद की डिग्री ही फर्जी हो, वो दूसरों को क्या न्याय दिलाएगा।
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-प्रदीप मजोत्रा, महासचिव, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन
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