जम्मू। साइबर ठगों ने ठगी का एक नया तरीका इजाद किया है, जिसे ''''जंप डिपॉजिट'''' नाम दिया गया है। इसके तहत साइबर अपराधी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए आपके खाते में 1,000 से 5,000 रुपये तक की छोटी रकम जमा करते हैं। यह रकम देखकर आपको लग सकता है कि किसी ने गलती से पैसा ट्रांसफर कर दिया है। जैसे ही आप बैलेंस चेक करने के लिए यूपीआई पिन डालते हैं, ठग आपके खाते को पूरी तरह खाली कर देते हैं।
हालांकि, अभी तक प्रदेश में इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने लोगों को सतर्क करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसे सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाएगा। इसके अलावा, लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष वीडियो भी तैयार किए गए हैं।
क्या है जंप डिपॉजिट
इस नए साइबर फ्रॉड में ठग पहले आपके खाते में छोटी रकम जमा करते हैं। जब आप बैलेंस चेक करने के लिए यूपीआई एप खोलते हैं, तो आपको एक पेमेंट रिक्वेस्ट प्राप्त होती है। इसे देखकर आप सोचते हैं कि यह बैलेंस चेक करने की रिक्वेस्ट है, लेकिन जैसे ही आप यूपीआई पिन डालते हैं, ठग आपके खाते से पूरी रकम निकाल लेते हैं।
यूपीआई पेमेंट को लेकर कैसे रहें सतर्क
यूपीआई पिन कभी साझा न करें: यूपीआई पिन आपके खाते की सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। इसे किसी के साथ भी साझा न करें।
भुगतान अनुरोधों को सत्यापित करें: किसी भी पेमेंट रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। अगर अनुरोध संदिग्ध लगे, तो उसे अस्वीकार कर दें।
आधिकारिक एप का ही उपयोग करें: यूपीआई लेनदेन के लिए केवल विश्वसनीय और सुरक्षित स्रोतों से डाउनलोड किए गए एप्स का ही उपयोग करें।
जागरूक रहें: साइबर ठगी के नए तरीकों और सुरक्षा युक्तियों के बारे में नियमित रूप से अपडेट रहें।
अगर आप शिकार बन गए हैं, तो क्या करें
तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और खाते को फ्रीज करवाएं।
साइबर क्राइम सेल या स्थानीय पुलिस को इसकी रिपोर्ट दर्ज कराएं।
अपने परिचितों को इस घोटाले के बारे में सचेत करें।
जंप डिपॉजिट से कैसे बचें
किसी भी अज्ञात व्यक्ति या संस्था से प्राप्त कॉल, ईमेल या मैसेज पर विश्वास न करें।
व्यक्तिगत जानकारी जैसे बैंक खाता नंबर, पासवर्ड या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें।
किसी भी लेनदेन से पहले पूरी तरह शोध करें और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करें।