जम्मू। सरकारी स्कूली में पढ़ने वाले बच्चों के शिक्षा स्तर में सुधार और शिक्षकों की जवाबदेही को तय करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 21 हजार स्कूलों में संरक्षक-शिक्षक (मेंटर-टीचर) पहल शुरू की है। इस पहल से पांच लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। इस पहल के तहत दस छात्रों के शिक्षा सुधार की जिम्मेवारी एक शिक्षक पर होगी। इसके लिए विभाग ने 40 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया है।
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई पहलों का उद्घाटन किया। इसमें प्रमुख रूप से राजोरी और शोपियां में आदिवासी छात्रों के लिए एक-एक आवासीय स्कूल, 100 स्कूलों में खेल के बुनियादी ढांचे की नींव सहित अन्य शामिल हैं। कार्यक्रम में उप-राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा बड़ा ही पवित्र पेशा है जिसकी पवित्रता सिर्फ शिक्षक ही बचाए रख सकता है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करनी होगी। विज्ञान और संस्कार का संतुलन विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों से जूझने में सक्षम बनाता है। इस दौरान दसवीं कक्षा के मेधावियों को सम्मानित किया। उन्होंने सभी लोगों से हर घर तिरंगा अभियान में भाग लेने को कहा। इस दौरान प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग बीके सिंह ने नई शिक्षा नीति के तहत की विभिन्न पहल के बारे में बताया।
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तलाश एप से जोड़ी स्कूल छोड़ चुके बच्चों संख्या
जम्मू-कश्मीर में स्कूल छोड़ चुके बच्चों की संख्या जुटाने के लिए विभाग ने सर्वे किया था। तलाश एप की मदद से हुए सर्वे में पाया गया कि 93 हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ा है। ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में लाकर उनका स्कूलों में दोबारा दाखिला किया जाएगा। उप-राज्यपाल ने कहा कि सभी के लिए पहुंच, समानता और परिणाम-उन्मुख गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार का प्रयास है।
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इन पहलों को किया शुरू किया
स्टेट मेंटरशिप प्रोजेक्ट, तलाश एप, प्री-प्राइमरी क्लासेज, 500 अटल टिंकरिंग लैब, 1935 प्री-प्राइमरी सेक्शन और 188 मॉडल बालवाड़ी का शुभारंभ किया। इस दौरान समग्र शिक्षा ने एचसीएल के साथ 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए टेकबीई कार्यक्रम के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए ।