जम्मू। कश्मीर घाटी में 1990 के हालात के बारे में हमने सिर्फ सुना था, लेकिन आज हम देख रहे हैं। कश्मीर में वर्तमान हालात 1990 के दशक से भी ज्यादा खराब हैं। सुरक्षा के अभाव में वहां रहना ‘आ बैल मुझे मार’ जैसा है। यह बात कश्मीर के विभिन्न जिलों में तैनात जम्मू संभाग के कर्मचारियों ने कही। ये कर्मचारी वीरवार को प्रेस क्लब के बाहर जम्मू बेस्ड रिजर्व्ड कैटेगरी इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे थे।
शिक्षिका रजनी बाला की कुलगाम में मंगलवार को हत्या के बाद से ही कश्मीर के विभिन्न जिलों में कार्यरत हजारों हिंदू अल्पसंख्यक सरकारी कर्मचारी घाटी छोड़कर जम्मू पहुंच रहे हैं। वीरवार को इन कर्मचारियों ने प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर अपने दर्द को बयां किया। कहा, घाटी में गैर-कश्मीरी कर्मचारियों के लिए काम करना अब आसान नहीं है। पहले हमें निशाना नहीं बनाया जाता था, लेकिन अब लक्षित हत्याएं हो रही हैं। सुबह अपनी नौकरी के लिए जाते हैं तो पता नहीं होता है कि शाम को जीवित लौट पाएंगे या नहीं। इस दौरान कर्मचारियों ने आंबेडकर चौक तक रैली भी निकाली। पुलिस ने कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेने के बाद फिर छोड़ दिया।
----
अगर सुरक्षा नहीं दे सकते तो तबादला करें
कर्मचारियों ने कहा कि सभी कर्मचारियों को सुरक्षा देना मुमकिन नहीं है। ऐसे में सरकार हालात सामान्य होने तक हमारा तबादला जम्मू संभाग में करे। हम अपनी ड्यूटी से नहीं भाग रहे हैं, लेकिन अगर हमारा जीवन ही सुरक्षित नहीं है तो हम ड्यूटी क्या करेंगे।
---
15 साल से मांग रहे तबादला
एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि हम 15 वर्ष से तबादले की मांग कर रहे हैं। हर पार्टी की सरकार के समय हम तबादला नीति की मांग करते रहे हैं, लेकिन हमें सिर्फ आश्वासन मिला है। अब सरकार हमारी सुरक्षा के मद्देनजर तबादला नीति बनाए और घाटी के हालात ठीक नहीं होने तक हमें गृह जिलों में तैनात किया जाए।
---
विभिन्न विभागों में आरक्षित वर्ग के तीन हजार कर्मचारी
कश्मीर संभाग के विभिन्न जिलों में विभिन्न विभागों में करीब 8 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें से लगभग 3 हजार आरक्षित वर्ग के शिक्षक हैं, जिनमें से दो हजार ने घाटी छोड़ दी है। शिक्षिका रजनी बाला की हत्या के बाद से कर्मचारियों का घाटी छोड़ने का सिलसिला शुरू हुआ था।
-----
डर के माहौल में नहीं कर सकते काम
अनंतनाग जिले में तैनात शिक्षक यशपाल ने कहा कि 2009 में उनकी नियुक्ति हुई थी। आतंकी पहले सुरक्षाबलों पर हमले करते थे, लेकिन अब हिंदू कर्मचारियों की लक्षित हत्या कर रहे हैं।हम सुरक्षा के अभाव में वहां कैसे काम करेंगे। एक अन्य कर्मचारी सुनीता देवी ने कहा कि एडीटी के तहत तबादले होते हैं, लेकिन अंतर संभागीय तबादले का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों के साथ घाटी में रहना पड़ता है। सरकार ऐसा प्रावधान करे कि कुछ समय के बाद कर्मचारी का अंतर संभागीय तबादला हो सके।
--------------------
अगर 370 हट सकता है तो तबादला नीति में भी बदलाव क्यों नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर में अभी जैसे हालात हैं वहां जिला मुख्यालय हो या तहसील कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है। सरकार अगर अनुच्छेद 370 हटा सकती है तो कर्मचारियों के लिए तबादला नीति में भी बदलाव कर सकती है। यह बात कुपवाड़ा जिले में तैनात महिला शिक्षिका अंजना बाला ने कही। उन्होंने कहा कि घाटी में हालात सामान्य होने तक हमारा तबादला जम्मू संभाग में कर दे।
अनंतनाग में कार्यरत शिक्षक रमेश चंद्र ने कहा कि हम 15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान हालात में हम ड्यूटी पर नहीं जा सकते हैं। सरकार हमारी सुरक्षा पुख्ता करे या फिर तबादला जम्मू संभाग में करे। कश्मीर में अभी हालात ऐसे हैं कि वहां मुस्लिम, हिंदू, सिख, कश्मीरी पंडित कोई भी सुरक्षित नहीं है।