जम्मू। पहले आतंकी और फिर अलगाववादी नेता बने यासीन मलिक की जिंदगी अब जेल में कटेगी। 3 दशकों से यासिन मलिक भारत में रहकर भी भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा और पाकिस्तान के गुण गाता रहा। आतंकी अफजल गुरू की मौत के बाद यासीन मातम मनाने पाकिस्तान तक चला गया और खूंखार आतंकी हाफिज सईद के साथ मंच सांझा किया।
जानकारी के अनुसार यासीन मलिक 1988 में पीओके चला गया था। यहां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उसे आतंकी प्रशिक्षण दिया। वह एक साल बाद ही कश्मीर लौट आया और उसने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट बनाया। यह संगठन सुरक्षाबलों की हत्या करने और कश्मीरी पंडितों की हत्या में मुख्य रूप से शामिल रहा। 1990 में यासीन को दबोच लिया गया और वह 1994 तक जेल में रहा। इस दौरान उसने अपने संगठन को आतंकवाद से दूर तो कर लिया, लेकिन अंदरूनी तौर पर आतंकवाद के साथ ही चलता रहा।