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अब मचेल यात्रा की कमान किसी एक श्राइन बोर्ड को

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जम्मू। किश्तवाड़ की मचेल यात्रा प्रदेश में मौजूद श्राइन बोर्ड में से कोई एक करवाएगा। अब तक यह यात्रा स्थानीय स्तर के प्रबंधन की ओर से करवाई जाती थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। साथ ही सरकार को सभी धर्मार्थ और धार्मिक संस्थानों के लिए एक समान कानून बनाने का निर्देश दिया।
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मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश रजनीश ओसवाल वाली खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई की। दरअसल, किश्तवाड़ के रहने वाले एक वकील अजय कुमार ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर सर्वशक्ति सेवक संस्था की वित्तीय धांधली की जांच कराने और मचेल यात्रा श्राइन बोर्ड गठित करने की मांग की थी। खंडपीठ ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि समग्र रूप से केंद्र शासित प्रदेश में प्रत्येक धर्मस्थल के लिए अलग से क़ानून बनाना एक उपयुक्त और व्यवहार्य अभ्यास नहीं हो सकता है। इसलिए जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के भीतर सभी धर्मार्थ और धार्मिक संस्थानों के लिए एक समेकित और एक समान कानून बनना चाहिए। हमें लगता है कि यह अधिक उपयुक्त और बेहतर होगा यदि सरकार ऐसे सभी संस्थानों की पहचान करती है। उम्मीद है कि सरकार इस संबंध में जल्द से जल्द बिना किसी देरी के सकारात्मक निर्णय लेगी। सभी धर्मार्थ एवं धार्मिक संस्थानों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। साथ ही यह भी आदेश दिया कि प्रदेश में जो श्राइन बोर्ड हैं, उनमें से किसी एक को मचेल यात्रा कराने का जिम्मा सौंपा जाए।
उल्लेखनीय है कि 1981 में भद्रवाह के रहने वाले ठाकुर कुलवीर सिंह मचेल गए थे। 1987 के बाद से लगातार उन्होंने भद्रवाह से मंदिर तक छड़ी यात्रा शुुरू की। इसके बाद से लगातार यह यात्रा हो रही है। जिसे स्थानीय स्तर की संस्था द्वारा आयोजित किया जाता रहा है।
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