जम्मू। हर साल गैर संचारी रोगों (नान कम्युनिकेबल डिजीज) से होने वाली मौतों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। देश में ही कुल मौतों में से 55 फीसदी गैर संचारी रोग से संबंधित होती हैं। जम्मू-कश्मीर में भी भौगोलिक और पहाड़ी परिस्थितियों में भीषण सड़क हादसे, हार्ट अटैक आदि घटनाओं में हजारों लोगों की मौत हो रही है। जिला स्तर पर सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण ऐसे लोगों की जान अधिक देर तक बचाना मुश्किल होता है। इन मौतों को रोकने के लिए अब जम्मू संभाग के दस जिलों में जिला और उपजिला स्तर के चिकित्सा केंद्रों में मौजूदा इमरजेंसी के अलावा मॉडल इमरजेंसी रूम स्थापित किए जा रहे हैं। गांधीनगर, सरवाल, रामबन, सांबा, कठुआ और उधमपुर अस्पतालों में ऐसे रूम स्थापित कर दिए गए हैं।
मॉडल इमरजेंसी रूम में आपात स्थिति में गंभीर मरीजों को बचाने का काम किया जाएगा। यह रूम जीवनरक्षक उपकरणों, संसाधनों और दवाओं से लैस होंगे। इससे गंभीर मरीजों को रेफर नहीं करना पडे़गा और वहीं पर उचित चिकित्सा दी जाएगी। इन रूम में आपात चिकित्सा प्रबंधन के लिए डॉक्टरों को नगरोटा स्थित स्किल एंड सिम्युलेशन सेंटर (जेएसएससी) में करोड़ों रुपये की मशीनरी और विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें आपात स्थिति में गंभीर मरीजों की सांसें चलाना, बहते खून को रोकना आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। हाल ही में रियासी जिला अस्पताल में स्टेमी से पीड़ित एक 40 वर्षीय पुरुष मरीज की जान को बचाया गया। इसमें मरीज को दो घंटे के भीतर उचित इलाज की जरूरत होती है, जिसमें मरीज को बेहतर इमरजेंसी चिकित्सा देकर उसके कोरोनरी में प्रवाह को सामान्य कर दिया गया। इमरजेंसी रूम में मौजूद डॉक्टरों को एक सोशल मीडिया के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों के समूह से जोड़ा जाएगा, जिसमें मसलन अगर कोई हार्ट अटैक का मरीज आता है तो उसका ईसीजी लेकर उस समूह को भेज दिया जाएगा, जिसमें मरीज को बचाने के लिए जरूरी दवाएं और अन्य सलाह दी जाएगी और वे सभी दवाएं मॉडल इमरजेंसी रूम में उपलब्ध रहेंगी। ऐसी इमरजेंसी चिकित्सा के लिए मरीजों को जिला मुख्यालयों औ्र मेडिकल कॉलेजों तक आना पड़ता है। कश्मीर में ऐसे मॉडल इमरजेंसी रूम पिछले कई वर्षों से काम कर रहे हैं।
संभाग में क्रिटिकल केयर मजबूत होगी : डीजी
परिवार कल्याण विभाग जम्मू कश्मीर व टीकाकरण के डीजी और स्वास्थ्य निदेशक जम्मू का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे डॉ. सलीम उर रहमान ने कहा कि मॉडल इमरजेंसी रूम बनने से संभाग के दस जिलों में क्रिटिकल केयर चिकित्सा मजबूत होगी। इसमें जिला और उपजिला अस्पतालों में ही गंभीर मरीजों को आधुनिक इमरजेंसी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।